कविता : जब भी मेरी मां मुस्कुराती है : शेख जमीरुल हक खान चौधरी
जब भी मेरी मां मुस्कुराती है,
दिल में एक रोशनी सी छा जाती है।
उसकी हँसी में जैसे सुकून मिलता है,
हर ग़म की छाया खुद ही मिट जाती है।
जब भी मेरी मां मुस्कुराती है,
थके हुए कदमों को राह मिल जाती है।
उसकी दुआओं का असर कुछ ऐसा है,
हर मुश्किल आसान बन जाती है।
जब भी मेरी मां मुस्कुराती है,
जिंदगी में बहार सी आ जाती है।
उसकी आँखों की चमक में ऐसा जादू है,
मेरी दुनिया ही संवर जाती है।
जब भी मेरी मां मुस्कुराती है,
मेरे सपनों को पर लग जाते हैं।
उसकी खुशी ही मेरी असली दौलत है,
उससे ही मेरे दिन सजे-संवर जाते हैं।
💖 मां की मुस्कान ही बच्चे की सबसे बड़ी ताकत होती है।