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यूपी पीसीएस-2024 में अपने पहले ही प्रयास में दूसरे स्थान रायबरेली की अनन्या पिता चलाते जनरल स्टोर और अनन्या की माता शिक्षिका

दूसरे स्थान पर रायबरेली की अनन्या त्रिवेदी हैं। रायबरेली की बेटी ने अपनी मेहनत पर भरोसा किया और बिना कोचिंग सफलता प्राप्त की। सेल्फ स्टडी और आर्टीफीशियल इंटेलीजेंस मदद से दूसरी रैंक हासिल करने वाली अनन्या के पिता की दुकान और मां सरकारी स्कूल में अध्यापिका हैं। कोतवाली थाना क्षेत्र की अनन्या की मां रेखा रानी डीह ब्लॉक के यूपीएस राजापुर में सहायक अध्यापिका हैं। रायबरेली में एएस पब्लिक स्कूल के बाद ‍उसने बीएचयू से बीएचयू से सामाजिक विज्ञान में पीजी किया। जहां पर उनको गोल्ड मेडल मिला है।

अनन्या को यकीन नहीं हो रहा
यूपी पीसीएस में दूसरा स्थान प्राप्त करने वाली अनन्या ने कहा कि वह यकीन नहीं कर पा रही हैं कि इतना अच्छा रिजल्ट आया है। जब मेंस क्वालीफाई हुआ तो वह बहुत आश्चर्यचकित थी कि इस प्रकार का रिजल्ट आया। उन्होंने कहा कि सफलता पाने के लिए कोई शॉर्टकट नहीं होता। निरंतर इसकी तैयारी करते रहना है। उन्होंने बताया कि मैंने बहुत घंटे लगातार पढ़ाई नहीं की, लेकिन मैं 2020 से यूपीएससी की तैयारी कर रही थी। पांच से छह घंटे जरूर पढ़ाई करती थी। परीक्षा से दो-तीन महीने पहले लगभग आठ घंटे पढ़ाई करनी शुरू कर दी थी। जो इस समय तैयारी कर रहे हैं, उनको यही संदेश है कि अपने सब्जेक्ट की प्लानिंग सही से करके उस पर ध्यान दें।
घर पर रहकर यूपीएससी की तैयारी
घर पर रहकर यूपीएससी की तैयारी करने वाली अनन्या अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं। अनन्या के बड़े भाई केंद्रीय सेवा में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि पीसीएस 2024 में उनकी दूसरी रैंक आने में मां और मामा का सहयोग बहुत मिला है। अब सरकार से आगे जो जिम्मेदारी मिलेगी उसका अच्छे से निर्वहन करेंगी। उन्होंने कहा कि यूपीएससी क्रैक करने का भी प्रयास करना चाहेंगी। अनन्या त्रिवेदी की इस कामयाबी से उनके घर-परिवार में खुशी का माहौल है।
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सिविल सेवा तो समाज सेवा का सबसे बेहतरीन प्लेटफॉर्म
अनन्या अभी यूपीएससी के लिए प्रयास करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि यह सफलता अंतिम पड़ाव नहीं बल्कि एक लॉन्चिंग पैड है। वे इसके अलावा वे 'क्लाइमेट क्राइसिस' (जलवायु संकट) जैसे मुद्दों पर काम करने की इच्छा रखती हैं जो उनके दिल के बेहद करीब है। उनका मानना है कि सिविल सेवा समाज के जरूरतमंद लोगों की सेवा करने का सबसे बेहतरीन प्लेटफॉर्म है।

चैट जीपीटी और ऑनलाइन सोर्सेज से की तैयारी
अनन्या ने बताया कि वह ग्रामीण परिवेश से आती हैं। अनन्या ने बताया कि पापा हमें स्कूल छोड़ने के लिए रोज 15 किलोमीटर दूर गांव से शहर आते थे। फिर वापस जाकर अपनी दुकान खोलते थे और छुट्टी के समय फिर लेने आते थे। अनन्या ने किसी नामी कोचिंग का सहारा नहीं लिया। अनन्या का मानना है कि आज के दौर में कंटेंट की कमी नहीं है। उन्होंने चैट जीपीटी और ऑनलाइन सोर्सेज का बखूबी इस्तेमाल किया। इस जर्नी में यह बहुत जरूरी है कि आप अपने लो मोमेंट्स और फेल्योर को कैसे मैनेज करते हैं।
मां उनकी सबसे बड़ी आदर्श
अनन्या की मां ने अपनी बेटी की सफलता को ईमानदारी का फल बताया। अनन्या ने कहा कि उनकी मां सबसे बड़ी आदर्श हैं जिन्होंने गांव में घर का काम संभालते हुए अनन्या और उनके भाई को पढ़ाया।

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