बिहार में बिजली बिल का नया गणित: 'टाइम ऑफ डे' (ToD) टैरिफ का पूरा सच l
बिहार में 1 अप्रैल 2026 से बिजली बिलिंग की व्यवस्था पूरी तरह बदलने जा रही है। अब आपकी बिजली की दर इस बात पर निर्भर करेगी कि आप किस समय बिजली का उपयोग कर रहे हैं। सरकार ने दिन के 24 घंटों को तीन हिस्सों (Slabs) में बाँट दिया है।
सरकार ने बिजली की बेस रेट ₹7.17 प्रति यूनिट (बिना सब्सिडी) तय की है। अब इसे तीन अलग-अलग दरों पर वसूला जाएगा और शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के साथ कुटीर ज्योति और ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं को सरकार के द्वारा अनुदान के पश्चात प्रभावी भुगते दर लागू रहेगा । जिसमें शहरी घरेलू उपभोक्ताओं को
सुबह 9 से शाम 5 बजे Off-Peak (80%) | ₹5.69 | ₹2.39
शाम 5 से रात 11 बजे Peak (110%) | ₹7.91 | ₹4.61
रात 11 से सुबह 9 बजे Normal (100%) | ₹7.17 | ₹3.87 |
चुनाव के समय घोषित "125 यूनिट मुफ्त बिजली" की योजना अभी भी जारी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बिहार के लगभग 90% घरेलू उपभोक्ताओं का उपभोग इस सीमा के भीतर रहता है, जिससे उनका बिल 'शून्य' आता है। लेकिन, जो मध्यम वर्गीय परिवार या कामकाजी लोग इस सीमा से बाहर जाते हैं, उनके लिए नया 'टाइम ऑफ डे' टैरिफ काफी असरदार साबित होगा।
सरकार और बिजली कंपनियों का कहना है कि इस बदलाव से लोग बिजली का 'मैनेजमेंट' करना सीखेंगे। अगर आप भारी उपकरण (जैसे वॉशिंग मशीन, पंप, या प्रेस) सुबह 9 से शाम 5 के बीच चलाते हैं, तो आपका बिल बहुत कम आएगा।
जबकि आम जनता की चुनौती का एक बड़ा पेंच है कि शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक का समय वह होता है जब लोग दफ्तर से घर लौटते हैं , किचन में खाना पकाने के लिए बिजली (इंडक्शन, मिक्सर) का उपयोग होता है। , बच्चों की पढ़ाई और टीवी का समय होता है। यानी सबसे ज्यादा जरूरत के समय ही बिजली सबसे महंगी (₹4.61 शहरी क्षेत्र में) होगी।
यह कहना गलत नहीं होगा कि 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने से कंपनियों पर जो आर्थिक बोझ पड़ा है, उसकी भरपाई 'पीक ऑवर्स' में महंगी बिजली बेचकर करने की कोशिश की जा रही है। स्मार्ट मीटर के जरिए अब कंपनियां हर घंटे का हिसाब रखेंगी।
एक जागरूक उपभोक्ता के तौर पर अब आपको "पावर प्लानिंग" करनी होगी। भारी काम दिन में निपटाएं और रात 11 बजे के बाद ही एसी या कूलर का अधिक उपयोग करें, तभी आप इस नई व्यवस्था से बच पाएंगे।
मनीष सिंह
शाहपुर पटोरी
@ManishSingh_PT