किसान बेहाल, दावे बेमिसाल—एमपी में अन्नदाता के साथ 'छलावा'?
मध्य प्रदेश का किसान एक बार फिर व्यवस्था की चक्की में पिसने को मजबूर है। एक तरफ राज्य की मोहन सरकार ने 1 अप्रैल से समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदी का ढिंढोरा पीटा, तो दूसरी तरफ हकीकत के धरातल पर किसान अपनी उपज लेकर दर-दर भटक रहा है। ताजा अपडेट के अनुसार, कई संभागों में खरीदी की तारीख को आगे बढ़ाकर 10 से 15 अप्रैल कर दिया गया है, जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं।
शिवराज सिंह के '8 गुना आय' वाले दावे पर सवाल
सदन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में दावा किया कि केंद्र के प्रयासों से किसानों की आय कई मामलों में 8 गुना तक बढ़ गई है। लेकिन विपक्ष और किसान संगठनों का कहना है कि ये दावे केवल कागजों और दूरबीनों तक सीमित हैं।
हकीकत का आईना: जमीनी स्तर पर किसान कर्ज के बोझ तले दबा है।
तारीखों का खेल: कर्ज की किश्त (KCC) चुकाने की आखिरी तारीख (31 मार्च) निकल चुकी है, लेकिन सरकारी केंद्रों पर खरीदी शुरू न होने के कारण किसान को मजबूरी में अपना अनाज कम दामों पर व्यापारियों को बेचना पड़ रहा है।
"मध्य प्रदेश का लाल, किसानों का हाल बेहाल"
सबसे बड़ा कटाक्ष देश के कृषि मंत्री पर हो रहा है, जो स्वयं मध्य प्रदेश की माटी से आते हैं। आरोप लग रहे हैं कि जिस राज्य ने उन्हें इस ऊंचाई तक पहुँचाया, आज वहीं का किसान सुरक्षा, संवेदना और समाधान के लिए तरस रहा है।
"सरकार ने पहले 16 मार्च की तारीख दी, फिर 1 अप्रैल और अब इसे फिर बढ़ा दिया गया है। क्या सरकार के पास बारदाने (जूट बैग) की कमी है या किसान की मेहनत की कोई कीमत नहीं?" — विपक्षी दलों का तीखा हमला।
मुख्य मुद्दे जो किसानों को सता रहे हैं:
कर्ज का चक्र: 31 मार्च तक कर्ज न चुका पाने पर ब्याज की छूट (Interest Subvention) खत्म हो जाती है, जिससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक भार बढ़ गया है।
लापरवाही का आलम: बार-बार खरीदी की तारीखें बदलना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।
मजबूरी में कम दाम: सरकारी तुलाई शुरू न होने से बिचौलिए सक्रिय हैं और किसान ₹2625 (बोनस सहित MSP) की जगह औने-पौने दामों पर फसल बेच रहा है।
निष्कर्ष: क्या कृषि मंत्री के 'आठ गुना आय' वाले दावों में मध्य प्रदेश के उन किसानों की गिनती भी शामिल है जो आज अपनी फसल के सही दाम के लिए उपार्जन केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं? यह सवाल आज प्रदेश के हर खेत-खलिहान में गूंज रहा है।