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मोदी सरकार के 125 दिनों के रोजगार के दावों का असली सच :

केंद्र सरकार के ग्राम्य विकास मंत्रालय के अंतर्गत दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत प्रदेश के सभी जनपद के डी आर पी (DRP) का मानदेय पिछले दो वर्षों से नहीं दिया जा रहा है, जबकि ग्रामीण समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण इन्ही DRP द्वारा दिया जाता है, उनसे मानसिक दबाव बनाकर कार्य ले लिया जाता है परन्तु मानदेय के नाम पर धमकी दी जाती है की नए DRP की नियुक्ति कर दी जाएगी अगर ज्यादा हो हल्ला किये मानदेय के लिए तो, जनपद के उच्च अधिकारियों का कहना है की प्रदेश से ही मिशन द्वारा बजट नहीं दिया जा रहा है सिर्फ लेटर जारी किया जा रहा है, कितने शर्म की बात है. इस सत्र में भी पिछले दो सत्रों की तरह मानदेय नहीं दिया गया. क्या DRP इंसान नहीं हैं? क्या उनके परिवार और बच्चे नहीं है? उनको शिक्षा और उनके पालन पोषण का अधिकार नहीं है? क्यों इतनी ज़्यादती की जा रही है? इनको चिकित्सा सुविधा, या किसी और सरकारी सुविधा का भी कोई अधिकार नहीं मिलता है, कम से कम मानदेय तो समय पर मिले. आखिर कौन जिम्मेदार है इसके लिए? राज्य सरकार? केंद्र सरकार? या मिशन? विचारणीय है

साक्ष्य के लिए उत्तर प्रदेश में अब तक 28 जनपद के DRP का सर्वे रिपोर्ट के कुछ अंश को संलग्न कर रहा हूँ

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