एटा, 28 मार्च 2026
एटा में स्कूलों की मनमानी पर प्रशासन सख्त, नियम विरुद्ध शुल्क वसूली पर होगी कड़ी कार्रवाई
जनपद एटा में निजी और सीबीएसई बोर्ड से संचालित विद्यालयों की मनमानी पर अब प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। अभिभावकों से मनमाने ढंग से शुल्क वसूली और शैक्षिक सामग्री के नाम पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग ने कड़े निर्देश जारी किए हैं।
जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) द्वारा 13 मार्च 2026 को आयोजित बैठक में सभी विद्यालयों को स्पष्ट चेतावनी दी गई थी कि वे किसी भी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता नहीं करेंगे। इसके बावजूद 28 मार्च को सोशल मीडिया और विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल वीडियो के जरिए यह सामने आया कि कुछ वित्तविहीन और सीबीएसई बोर्ड से जुड़े विद्यालय अपने नाम से किताबें छपवाकर ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। इतना ही नहीं, छात्रों से हर वर्ष प्रवेश शुल्क (एडमिशन फीस) भी वसूला जा रहा है, जो नियमों के खिलाफ है।
डीआईओएस कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि “उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2018” के तहत बिना अनुमति शुल्क वृद्धि, वार्षिक प्रवेश शुल्क वसूली तथा स्कूल परिसर में किताबें और ड्रेस बेचना पूरी तरह प्रतिबंधित है। साथ ही, सीबीएसई और एनसीईआरटी के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी छात्र को एक निश्चित दुकान या प्रकाशक से सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
डीआईओएस ने अभिभावकों से अपील की है कि यदि उन्हें किसी भी प्रकार की अनियमितता नजर आती है तो वे प्रमाण सहित इसकी शिकायत करें, ताकि दोषी संस्थानों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
इस संबंध में जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, शिक्षा निदेशक समेत अन्य संबंधित अधिकारियों को भी सूचना भेज दी गई है, जिससे जिले की शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और नियमसम्मत बनाया जा सके।
मानवाधिकार संगठन की पहल से बढ़ी कार्रवाई
इस पूरे मामले को नेशनल मानवाधिकार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी यादव और उनकी टीम ने प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया और सख्त निर्देश जारी किए गए। विभाग की इस कार्रवाई से जिले के निजी विद्यालयों में हड़कंप मच गया है।