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क्लासरूम बना चुनावी मंच? रूपनगर स्कूल में BJP झंडे-बैनर मिलने से हड़कंप

मध्य गुवाहाटी की राजनीति में उस सुबह सब कुछ सामान्य दिख रहा था।
स्कूल की घंटी बज चुकी थी।
बच्चे अपनी कक्षाओं में बैठ चुके थे।
कॉपी-किताबें खुल चुकी थीं।
ब्लैकबोर्ड पर तारीख लिखी जा चुकी थी।
लेकिन…
रूपनगर विद्यापीठ एमई स्कूल के एक क्लासरूम के भीतर कुछ ऐसा था,
जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी।

पहली नजर में यह एक साधारण क्लासरूम लग रहा था।
दीवारें वही थीं।
बेंच वही थे।
खिड़कियों से आती धूप भी वही थी।
मगर कमरे के भीतर मौजूद कुछ चीजें सवाल खड़े कर रही थीं।

क्लासरूम की दीवारों पर कथित तौर पर भाजपा के झंडे लगे थे।
बैनर भी टंगे हुए बताए गए।
और उन बैनरों पर लिखा था एक नाम—
मध्य गुवाहाटी के उम्मीदवार विजय गुप्ता।

यहीं से शुरू हुआ शक।
यहीं से उठी फुसफुसाहट।
और यहीं से शुरू हुआ वह विवाद
जो देखते ही देखते पूरे निर्वाचन क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया।

स्थानीय लोगों ने जब यह दृश्य देखा,
तो पहले उन्हें अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ।
क्या सचमुच एक स्कूल के भीतर चुनावी प्रचार हो रहा था?
क्या बच्चों की पढ़ाई की जगह
राजनीतिक संदेशों का मंच बन गई थी?

कुछ अभिभावकों ने इसे देखकर गहरी नाराजगी जताई।
कुछ ने सवाल उठाया—
अगर स्कूल भी राजनीति का अड्डा बन जाए,
तो बच्चों के भविष्य का क्या होगा?

धीरे-धीरे खबर आग की तरह फैलने लगी।
हर गली में यही चर्चा थी।
हर चाय की दुकान पर यही सवाल था।
आखिर क्लासरूम के अंदर यह सब हुआ कैसे?

मामला और भी रहस्यमय तब हो गया
जब मीडिया कर्मी स्कूल पहुंचे।
कहा जा रहा है कि
मीडिया के पहुंचने से पहले ही
अंदर का पूरा दृश्य बदल दिया गया था।

जहां झंडे होने की बात कही गई,
वहां अब कुछ नहीं था।
जहां बैनर होने का दावा था,
दीवारें खाली नजर आईं।

यही वह पल था
जब शक और गहरा गया।
अगर कुछ हुआ ही नहीं था,
तो फिर जल्दबाजी में बदलाव क्यों?
और अगर हुआ था,
तो किसके कहने पर?

स्कूल परिसर के बाहर लोगों की भीड़ जुटने लगी।
हर कोई सच जानना चाहता था।
हर कोई उस क्लासरूम की कहानी सुनना चाहता था।

कुछ लोगों का कहना था
कि यह चुनावी नियमों का खुला उल्लंघन है।
कुछ ने इसे बेहद गंभीर साजिश बताया।
तो कुछ इसे प्रशासन की लापरवाही मान रहे हैं।

मामला सीधे चुनाव आचार संहिता से जुड़ा था।
और यही वजह थी
कि प्रशासन भी हरकत में आ गया।

कामरूप जिला निर्वाचन अधिकारी ने
घटना को गंभीरता से लेते हुए
रूपनगर विद्यापीठ एमई स्कूल के प्रधानाध्यापक को
कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया।

नोटिस में साफ कहा गया—
24 घंटे के भीतर जवाब दें।
बताएं कि स्कूल परिसर में
इस तरह की गतिविधि कैसे हुई।
किसकी अनुमति से हुई।
और अगर नहीं हुई,
तो आरोप क्यों लग रहे हैं?

अब सबकी नजर उस जवाब पर टिक गई है।
प्रधानाध्यापक क्या कहेंगे?
क्या वह किसी दबाव की बात सामने लाएंगे?
क्या यह किसी स्थानीय कार्यकर्ता की हरकत थी?
या फिर मामला उससे भी बड़ा है?

राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है।
विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बनाने में जुट गया है।
वहीं समर्थक इसे साजिश करार दे रहे हैं।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है—
क्या शिक्षा के मंदिर को
राजनीति का मंच बनाया गया?

चुनाव आचार संहिता के मुताबिक
किसी भी शिक्षण संस्थान में
राजनीतिक प्रचार पूरी तरह प्रतिबंधित है।
न झंडे।
न पोस्टर।
न बैनर।
न किसी उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार।

ऐसे में अगर आरोप सही साबित होते हैं,
तो यह केवल नियम उल्लंघन नहीं,
बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर भी बड़ा सवाल होगा।

स्थानीय लोगों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है।
अभिभावक जवाब मांग रहे हैं।
छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है।

कुछ लोगों का कहना है
कि अगर इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई,
तो यह गलत परंपरा की शुरुआत हो सकती है।

इस पूरे घटनाक्रम ने
मध्य गुवाहाटी निर्वाचन क्षेत्र के चुनावी माहौल को
और भी गर्म कर दिया है।

हर कोई इंतजार में है—
क्या 24 घंटे बाद सच सामने आएगा?
क्या प्रधानाध्यापक की सफाई
पूरी कहानी बदल देगी?
या फिर यह मामला
और बड़े खुलासे की तरफ बढ़ेगा?

स्कूल का वह क्लासरूम
अब सिर्फ एक कमरा नहीं रह गया है।
वह अब सवालों का केंद्र बन चुका है।
वह अब जांच का विषय है।
वह अब चुनावी बहस का नया केंद्र है।

दीवारें खामोश हैं।
बेंच खामोश हैं।
ब्लैकबोर्ड खामोश है।
लेकिन उन खामोश दीवारों के बीच
एक कहानी छिपी है।

एक ऐसी कहानी
जो अगले 24 घंटों में
असम की राजनीति में बड़ा मोड़ ला सकती है।

क्या सच में क्लासरूम बना चुनावी मंच?
क्या सबूत मिटाने की कोशिश हुई?
क्या प्रशासन सख्त कदम उठाएगा?

इन सवालों के जवाब अभी बाकी हैं।
और यही अधूरापन
इस पूरे मामले को और भी रहस्यमय बना रहा है।

फिलहाल,
मध्य गुवाहाटी की जनता
सिर्फ एक चीज का इंतजार कर रही है—
सच का।

क्योंकि स्कूल की दीवारों में छिपा यह रहस्य
अब ज्यादा देर तक दबा रहना मुश्किल है।

अगले 24 घंटे
इस मामले की दिशा तय करेंगे।
और शायद यह भी तय करेंगे
कि चुनावी मर्यादा कितनी सुरक्षित है।

फिलहाल सस्पेंस बरकरार है।
क्लासरूम वही है।
स्कूल वही है।
मगर सवाल बदल चुके हैं।

और अब पूरा मध्य गुवाहाटी पूछ रहा है—
आखिर उस दिन
क्लासरूम के अंदर
हुआ क्या था?

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