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मिडिल ईस्ट में जारी इस महायुद्ध का भारत पर सीधा और गहरा असर पड़ रहा है।

मिडिल ईस्ट में जारी इस महायुद्ध का भारत पर सीधा और गहरा असर पड़ रहा है। चूँकि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा इस क्षेत्र से जुड़ा है, इसलिए चुनौतियाँ काफी बढ़ गई हैं।
भारत पर पड़ने वाले मुख्य प्रभाव नीचे दिए गए हैं:
1. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल (Energy Security)
भारत अपनी जरूरत का लगभग 80-85% कच्चा तेल आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों (इराक, सऊदी अरब, यूएई) से आता है।
* सप्लाई चेन में बाधा: 'होर्मुज़ जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण तेल के टैंकर फंस रहे हैं।
* महंगाई का डर: कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में $100 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं, जिससे भारत में पेट्रोल, डीजल और गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने का सीधा खतरा है।
2. भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा (Remittances & Safety)
मिडिल ईस्ट में लगभग 90 लाख भारतीय रहते और काम करते हैं।
* निकासी की चुनौती: अगर युद्ध और फैला, तो 'ऑपरेशन अजय' जैसे बड़े रेस्क्यू मिशन की जरूरत पड़ सकती है।
* कमाई पर असर: भारतीयों द्वारा घर भेजे जाने वाले पैसे (Remittances) में कमी आ सकती है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था का एक मजबूत आधार है। जैसा कि हाल ही में रियाद (सऊदी अरब) में एक भारतीय की मौत की खबर आई है, इससे वहां रह रहे भारतीयों में डर का माहौल है।
3. व्यापार और एक्सपोर्ट पर संकट
भारत के लिए मिडिल ईस्ट एक बड़ा व्यापारिक पार्टनर है।
* रसद और शिपिंग: लाल सागर (Red Sea) और खाड़ी के रास्तों में हमलों के कारण शिपिंग कंटेनरों का किराया 200-300% तक बढ़ गया है।
* अनाज और चाय का निर्यात: भारत से खाड़ी देशों को होने वाले चावल, मसाले और फल-सब्जियों के निर्यात पर ब्रेक लग गया है, जिससे भारतीय किसानों और व्यापारियों को नुकसान हो रहा है।
4. 'IMEC' प्रोजेक्ट पर ग्रहण
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC), जिसे भारत एक गेम-चेंजर मान रहा था, इस युद्ध के कारण ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है। इजरायल और अरब देशों के बीच बिगड़ते रिश्तों ने इस कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट को लगभग नामुमकिन बना दिया है।
5. कूटनीतिक संतुलन (Diplomatic Tightrope)
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती बैलेंस बनाना है:
* एक तरफ भारत के इजरायल के साथ मजबूत रणनीतिक और रक्षा संबंध हैं।
* दूसरी तरफ ईरान के साथ चाबहार पोर्ट और पुराने ऐतिहासिक रिश्ते हैं।
* साथ ही, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों के साथ भारत के गहरे आर्थिक हित जुड़े हैं।
निष्कर्ष:
भारत वर्तमान में "वेट एंड वॉच" (इंतजार करो और देखो) की स्थिति में है। भारत लगातार शांति की अपील कर रहा है, क्योंकि इस युद्ध का लंबा खिंचना भारतीय मध्यम वर्ग की जेब पर भारी पड़ेगा और देश की विकास दर (GDP) को धीमा कर सकता है।

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