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विद्युत विभाग मस्त, उपभोक्ता त्रस्त — स्मार्ट मीटर व्यवस्था पर उठते सवाल

उत्तर प्रदेश के कई शहरों में इन दिनों विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। “स्मार्ट मीटर” के नाम पर पुराने मीटरों को बदलकर नई प्रणाली लागू की जा रही है, लेकिन इसके साथ ही आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
विद्युत विभाग द्वारा मीटर बदलने का कार्य निजी कंपनियों को आउटसोर्स कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों प्रकार की बिलिंग का प्रावधान बताया गया था। पहले उपभोक्ता पोस्टपेड प्रणाली के तहत नियमित रूप से बिल जमा करते आ रहे थे, लेकिन हाल के दिनों में अचानक बिना किसी पूर्व सूचना के हजारों उपभोक्ताओं की बिजली काट दी गई।
जब उपभोक्ता अपने नजदीकी पावर हाउस पहुंचे, तो उन्हें बताया गया कि उनके मीटर को प्रीपेड में बदल दिया गया है और अब बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए तुरंत रिचार्ज कराना होगा। इस अचानक बदलाव ने आम आदमी की दिनचर्या को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।
बिजली गुल होने से पानी की सप्लाई ठप हो गई, बच्चों की पढ़ाई बाधित हो गई, वर्क फ्रॉम होम कर रहे लोगों का काम रुक गया, और घरों में बुजुर्गों को अंधेरे में रहने को मजबूर होना पड़ा। रसोई तक प्रभावित हुई—न खाना बन पा रहा है, न ही सामान्य जीवन चल पा रहा है।
स्थिति और गंभीर तब हो गई जब कई उपभोक्ताओं ने जल्दबाजी में ऑनलाइन भुगतान तो कर दिया, लेकिन “सर्वर फॉल्ट” के कारण उनकी पेमेंट अपडेट ही नहीं हुई। नतीजतन, पैसे कटने के बावजूद बिजली बहाल नहीं हो सकी। विभाग से संपर्क करने पर जवाब मिला कि सर्वर निजी कंपनियों के नियंत्रण में है और वे इस समस्या के लिए जिम्मेदार नहीं हैं।
ऐसे में बड़ा सवाल खड़ा होता है—जब व्यवस्था सरकारी है, तो जिम्मेदारी किसकी है? उपभोक्ता आखिर अपनी समस्या लेकर कहां जाए? ठेकेदार कंपनियां मनमानी कर रही हैं, विद्युत विभाग चुप्पी साधे बैठा है, और आम जनता दर-दर भटकने को मजबूर है।
जनता अब जवाब मांग रही है।
क्या बिना सूचना मीटर बदलना और बिजली काटना उचित है?
क्या उपभोक्ताओं के अधिकारों का इस तरह हनन किया जाना न्यायसंगत है?
क्या सरकार इस अव्यवस्था पर कोई ठोस कदम उठाएगी?
आज जरूरत है कि सरकार इस पूरे मामले का संज्ञान ले, जिम्मेदार अधिकारियों और कंपनियों पर कार्रवाई करे, और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए स्पष्ट एवं पारदर्शी व्यवस्था लागू करे।
अन्यथा “स्मार्ट मीटर” योजना, आम जनता के लिए सुविधा नहीं, बल्कि एक बड़ी समस्या बनकर रह जाएगी।
संजय शर्मा सीनियर सोशल एक्टिविस्ट, गाजियाबाद

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