बांदा जिला अस्पताल की बदहाली ने उजागर की स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्चाई, बुनियादी सुविधाओं का अभाव
बांदा जिला अस्पताल की बदहाली ने उजागर की स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्चाई, बुनियादी सुविधाओं का अभाव
उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद का जिला अस्पताल इन दिनों बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था का जीता-जागता उदाहरण बन गया है, जहां मरीजों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं और हाल ही में जदयू की प्रदेश उपाध्यक्ष एवं बुंदेलखंड प्रभारी शालिनी सिंह पटेल द्वारा किए गए निरीक्षण में स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई, अस्पताल के बाथरूम जर्जर हालत में हैं, कई जगह पानी की कोई व्यवस्था नहीं है और अधिकांश दरवाजे टूटे पड़े हैं जिससे मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, ट्रॉमा सेंटर की हालत भी बदतर बनी हुई है जहां मरीजों के लिए लगाए गए एसी पूरी तरह बंद पड़े हैं और केवल शोपीस बनकर रह गए हैं, भीषण गर्मी में मरीजों को राहत तक नहीं मिल पा रही, इतना ही नहीं ट्रॉमा सेंटर में बेड की भारी कमी है जिसके चलते कई मरीजों को जमीन पर लिटाकर इलाज किया जा रहा है, भर्ती वार्ड में भी बेड की संख्या अपर्याप्त है और मरीजों को बैठने तक की जगह नहीं मिल पा रही है, अस्पताल परिसर के पीछे बनी नई बिल्डिंग भी उपयोग में न लाकर केवल शोपीस की तरह खड़ी है जिससे सरकार की योजनाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं, कई जरूरी मशीनें खराब पड़ी हैं या उनका उपयोग नहीं हो रहा जिससे इलाज प्रभावित हो रहा है, मरीजों को मिलने वाला भोजन भी मानकों के अनुरूप नहीं है और शिकायत करने पर उन्हें चुप रहने की सलाह दी जाती है, इस गंभीर मुद्दे को लेकर पहले भी कई बार जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है लेकिन अब तक कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है, निरीक्षण के बाद शालिनी सिंह पटेल ने कहा कि यह अस्पताल गरीब, किसान, मजदूर, महिलाओं और बुजुर्गों की अंतिम उम्मीद है क्योंकि सक्षम लोग निजी अस्पतालों का रुख कर लेते हैं, उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह लगातार जनता की आवाज उठाती रही हैं और आगे भी उठाती रहेंगी और यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो जनहित में व्यापक स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।