जेएनयू में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर राष्ट्रीय सम्मेलन, आधुनिक युद्ध की नई रणनीतियों पर मंथन
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के विशेष केंद्र राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन (SCNSS) द्वारा 24-25 मार्च 2026 को “ऑपरेशन सिंदूर: आधुनिक युद्ध के उभरते आयाम” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण गोष्ठी में देशभर से आए सैन्य विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विभिन्न महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने भाग लिया।
सम्मेलन के दौरान आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप—जैसे साइबर युद्ध, अंतरिक्ष क्षेत्र, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मल्टी-डोमेन इंटीग्रेशन—पर गहन चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने अपने विचार रखते हुए कहा कि भविष्य के युद्ध पारंपरिक सीमाओं तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि तकनीक और सूचना के माध्यम से अधिक जटिल और व्यापक होंगे।
विशेषज्ञों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को भारत की आक्रामक रक्षा नीति का सशक्त उदाहरण बताया। यह ऑपरेशन मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी। इस कार्रवाई के तहत भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पीओजेके में सक्रिय आतंकवादी संगठनों—लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन—के नौ ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए। इस ऑपरेशन में ब्रह्मोस मिसाइल, आकाशतीर एयर डिफेंस सिस्टम और स्वदेशी लोइटरिंग म्यूनिशन जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग किया गया।
सम्मेलन में वक्ताओं ने आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक और हथियार प्रणाली के विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत को त्वरित निर्णय क्षमता और मजबूत रणनीतिक नीति अपनानी होगी, ताकि सीमा पार आतंकवाद और अन्य सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।
राजनीति विज्ञान की छात्रा खुशबू ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन देश को आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली की दिशा में आगे बढ़ाता है और संकट के समय त्वरित एवं सटीक प्रतिक्रिया देने की क्षमता को मजबूत करता है। साथ ही, इससे आतंकवाद को समर्थन देने वाले देशों पर कड़ा दबाव बनता है और उनकी वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचता है।
सम्मेलन के निष्कर्ष में यह बात उभरकर सामने आई कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने भारत की ‘न्यू नॉर्मल’ रक्षा नीति को स्थापित किया है, जिसमें आतंकवादियों और उनके समर्थकों के प्रति सख्त रुख अपनाया गया है। विशेषज्ञों ने इसे वर्ष 2047 तक भारत को एक सशक्त और सुरक्षित वैश्विक शक्ति बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।