नारी का सदैव सम्मान करो
बीतें दिवस प्रतापगढ़ की सड़क पर एक ऐसा दृश्य देखा, जिसने दिल को भीतर तक छू लिया।
एक महिला अपने करीब पाँच साल के मासूम बच्चे को साथ लेकर ई-रिक्शा चला रही थी…
चेहरे पर थकान जरूर थी, लेकिन आँखों में अटूट हिम्मत और जिम्मेदारियों की चमक साफ दिख रही थी।
कुछ पल के लिए मन भर आया…
सोचा, कितनी मजबूरियां रही होंगी जो उन्हें इस राह पर ले आईं।
लेकिन अगले ही क्षण दिल गर्व से भर गया—
क्योंकि वह महिला किसी पर निर्भर नहीं थी,
वह खुद अपने परिवार की ताकत बनी हुई थी।
वह सिर्फ रिक्शा नहीं चला रही थी,
वह अपने बच्चों के सपनों को आगे बढ़ा रही थी,
अपने घर की उम्मीदों को संभाल रही थी।
उसके हर कदम में संघर्ष था,
हर मोड़ पर साहस…
और हर सांस में एक जिद—
“हार नहीं मानूंगी।”
आज जब समाज में कई लोग हालातों के आगे झुक जाते हैं,
वहीं ये नारी हमें सिखा रही है कि
कर्म ही सबसे बड़ा धर्म है।
वह यह भी बता रही है कि
सम्मान किसी कुर्सी या पद से नहीं,
बल्कि मेहनत और आत्मसम्मान से मिलता है।
ऐसी हर नारी को मोहित का नमन—
जो आँसू छुपाकर मुस्कुराती है,
जो थककर भी रुकती नहीं,
जो टूटकर भी अपने परिवार को जोड़ती है…
सच में, नारी अबला नहीं—शक्ति है।
और उसकी यह चुपचाप लड़ाई ही
एक दिन समाज की सबसे बड़ी प्रेरणा बनेगी।
✍️ Mohit Tiwari