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आयकर का बड़ा ऑपरेशन: देहरादून में आईजी स्टांप कार्यालय पर जांच, उच्च मूल्य की रजिस्ट्रियां खंगाली गईं

देहरादून | संपत्ति क्षेत्र में संभावित कर चोरी और अघोषित नकद लेनदेन की आशंका के बीच आयकर विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए महानिरीक्षक (आईजी) स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन कार्यालय में दस्तावेजों की गहन जांच की। आयकर विभाग की इंटेलिजेंस एवं क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन विंग की टीम ने विशेष रूप से उच्च मूल्य की संपत्तियों की रजिस्ट्रियों का रिकॉर्ड खंगालते हुए पिछले लगभग पांच वर्षों के दौरान हुए लेनदेन की जानकारी जुटाई।

सूत्रों के अनुसार, 30 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की रजिस्ट्रियों को प्राथमिकता के आधार पर जांच के दायरे में लिया गया। इस प्रक्रिया में हजारों रजिस्ट्रियां आयकर विभाग की निगरानी में आ गई हैं, जिनमें बाजार मूल्य और सर्किल रेट के बीच अंतर की जांच की जा रही है।

रियल एस्टेट सेक्टर में कैश ट्रांजेक्शन पर फोकस:
विशेषज्ञों के अनुसार, रियल एस्टेट सेक्टर लंबे समय से अघोषित नकद लेनदेन (ब्लैक मनी) के संभावित माध्यम के रूप में चिन्हित किया जाता रहा है। कई मामलों में संपत्ति का वास्तविक सौदा बाजार दर पर तय होता है, जबकि रजिस्ट्री सर्किल रेट के आधार पर की जाती है। दोनों मूल्यों के बीच का अंतर कथित रूप से नकद में लिया जाता है, जिसकी जानकारी आयकर रिटर्न में नहीं दिखाई जाती।

आयकर विभाग को आशंका है कि बड़ी संख्या में उच्च मूल्य के लेनदेन की जानकारी पूरी तरह घोषित नहीं की गई है। इसी आधार पर विभाग की टीम ने आईजी स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन कार्यालय में दस्तावेजों का सत्यापन किया। जानकारी के अनुसार अधिकारी सुबह से देर रात तक जांच में जुटे रहे।

सहकारी बैंकों के लेनदेन भी जांच के घेरे में:
जांच के दौरान गढ़वाल मंडल के तीन और कुमाऊं मंडल के दो सहकारी बैंकों के वित्तीय लेनदेन का भी परीक्षण किया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार लगभग 3000 करोड़ रुपये से अधिक के ऐसे ट्रांजेक्शन सामने आए हैं, जिनकी पूर्ण जानकारी विभागीय रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं थी। कई मामलों में पैन नंबर दर्ज न होने की बात भी सामने आई है। संबंधित रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है।

कानूनी प्रावधानों के तहत हो सकती है कार्रवाई:
कर विशेषज्ञों के अनुसार यदि संपत्ति का लेनदेन घोषित मूल्य से अधिक पर किया गया है और उसका उचित खुलासा नहीं किया गया है, तो आयकर अधिनियम की विभिन्न धाराएं लागू हो सकती हैं:
✓ धारा 50C (Section 50C) – यदि संपत्ति का बिक्री मूल्य सर्किल रेट से कम दर्शाया जाता है, तो स्टांप वैल्यू को ही कर निर्धारण का आधार माना जाता है।
✓ धारा 56(2)(x) – बाजार मूल्य से कम कीमत पर संपत्ति खरीदने पर अंतर की राशि को आय मानकर कर लगाया जा सकता है।
✓ धारा 269SS / 269ST – निर्धारित सीमा से अधिक नकद लेनदेन पर प्रतिबंध और दंड का प्रावधान।
✓ धारा 147 / 148 – आय छिपाने की आशंका पर पुनर्मूल्यांकन (Reassessment) की कार्रवाई।

पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम:
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की कार्रवाई से रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ेगी और बड़े नकद लेनदेन पर निगरानी और सख्त हो सकती है। इससे भविष्य में संपत्ति के वास्तविक मूल्य पर रजिस्ट्रेशन को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

आयकर विभाग की आगे की कार्रवाई रिपोर्ट के परीक्षण के बाद तय की जाएगी। फिलहाल इस जांच को राज्य में बड़े स्तर पर चल रही कर अनुपालन प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

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