स्मार्ट मीटर सहारनपुर
हमारे शहर में स्मार्ट मीटर लगाए गए तो लोगों को भरोसा दिया गया कि सब कुछ पहले जैसा ही रहेगा। पुराने मीटर हटे, नए लग गए। पुराने बिल का बकाया भी तुरंत नहीं जोड़ा गया, तो लोगों को लगा कि चलो राहत मिली 😊
लेकिन कुछ ही दिनों बाद बिना किसी पूर्व सूचना के सिस्टम को प्रीपेड कर दिया गया। हाल ये कि मीटर में बिजली आ रही थी, पर घर के अंदर सप्लाई बंद — यानी कनेक्शन चुपचाप काट दिए गए।
लोग भागते हुए बिजलीघर पहुंचे, तब पता चला कि पहले बकाया जमा करना जरूरी है। सबने जल्दी-जल्दी ऐप डाउनलोड कर भुगतान करना शुरू किया, लेकिन उसके बाद भी बिजली नहीं आई। जवाब मिला — “24 घंटे तक इंतजार करें।” 🤣
दोपहर होते-होते ऐप ने भी काम करना बंद कर दिया 😔
ना खुल रही थी, ना भुगतान हो पा रहा था। माहौल ऐसा बन गया कि लोग एक-दूसरे से पूछते घूम रहे थे — “तुम्हारी भी गई क्या?” 🤣
शाम तक सर्वर पूरी तरह ठप हो गया और आखिरकार विभाग को खुद ही सप्लाई रोकनी पड़ी। रात करीब 10 बजे जाकर कहीं बिजली वापस आई।
अब स्थिति ये है कि प्रीपेड मीटर में हर समय बैलेंस बनाए रखना जरूरी हो गया है।
बदलाव गलत नहीं होता — गैस, मोबाइल, राशन जैसी कई चीजें हम पहले से ही एडवांस में लेते हैं।
लेकिन सवाल व्यवस्था से है:
क्या लोगों को पहले से सूचना देना जरूरी नहीं था?
क्या सिस्टम इतना मजबूत नहीं होना चाहिए था कि इतना लोड संभाल सके?
और जो लोग रोज कमाकर रोज खाते हैं, उनके लिए क्या कोई ठोस व्यवस्था है?
सवाल बहुत हैं… जवाब अब भी इंतज़ार में हैं।