माटी का अभिमान, मामटखेड़ा का मान:-ठाकुर चरणसिंह जी राठौड़ – संघर्ष से जननायक तक का सफर*
*माटी का अभिमान, मामटखेड़ा का मान:*
*ठाकुर चरणसिंह जी राठौड़ – संघर्ष से जननायक तक का सफर*
मेने ठाकुर चरणसिंह जी राठौड़ के व्यक्तित्व और उनके सरपंच बनने के उस ऐतिहासिक सफर को बहुत ही सुंदर और भावुक शब्दों में लिखने की कोशिश की है।
एक छोटे भाई के नाते कुछ अन कहे, अन सुने शब्दो को लिखने की कोशिश
*"ना थके कभी पैर, ना कभी हिम्मत हारी है,*
*मामटखेड़ा की सेवा का अब, ज़ज्बा फिर से जारी है।"*
*संघर्ष से शिखर तक:*
जन-जन के लाडले ठाकुर चरणसिंह जी राठौड़ एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्म, और संघर्ष की ऐसी कहानी जिस पर यकीन करना मुश्किल हो जाए... जी हाँ,
मैं बात कर रहा हूँ मामटखेड़ा गाँव की शान, ठाकुर चरणसिंह जी राठौड़ की। आप न केवल राजपूत समाज, बल्कि हर वर्ग और समाज के लिए गौरव का प्रतीक माने जाते हैं।
*"विरासत से तय नहीं होंगे सियासत के फैसले,*
*ये तो उड़ान तय करेगी कि आसमान किसका है!"*
यह महज़ एक शेर नहीं, बल्कि ठाकुर चरणसिंह जी राठौड़ के जीवन का सार है। आज जब हम मामटखेड़ा में विकास की बयार देखते हैं, एक सजग नेतृत्व को देखते हैं, तो उसके पीछे की तपस्या और संघर्ष की कहानी भी उतनी ही प्रेरणादायक है। एक मध्यमवर्गीय आँगन से निकलकर गाँव के सर्वोच्च पद (सरपंच) तक पहुँचना और जन-जन का लाड़ला बनना, ठाकुर साहब के फौलादी इरादों और उनकी निश्छल सेवाभावना का प्रमाण है।
*जीवन की भट्ठी में तपकर बना व्यक्तित्व*
ठाकुर चरणसिंह जी का जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार की सादगी और संघर्षों के बीच हुआ। बचपन से ही उन्होंने जीवन की वास्तविकताओं और जिम्मेदारियों को करीब से देखा। अभावों ने उन्हें कमजोर नहीं, बल्कि मानसिक रूप से और भी मजबूत बनाया। खेती-किसानी की धूप में तपना हो या परिवार की हर छोटी-बड़ी जरूरत के लिए तत्पर रहना, उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनका जीवन इस बात का गवाह है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, यदि इंसान के हौसले बुलंद हों और इरादे नेक हों, तो हर मंजिल हासिल की जा सकती है।
*सरलता की प्रतिमूर्ति और गाँव का विश्वास*
सरपंच बनने से पहले भी और आज सरपंच पद पर आसीन होने के बाद भी, ठाकुर साहब की सरलता उनकी सबसे बड़ी ताकत है। पूरा मामटखेड़ा एक परिवार है और वह इस परिवार के हर सुख-दुःख में एक स्तंभ की तरह खड़े रहते हैं। गाँव की कोई भी समस्या हो—चाहे वह पानी का मुद्दा हो, रास्ते का विवाद हो या किसी गरीब परिवार की मदद की बात हो—उनका समाधान सदैव प्रेम, शांति और मानवीय दृष्टिकोण के साथ होता है।
खेती की कड़ी मेहनत और परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी वह गाँव के हर नागरिक के लिए चौबीसों घंटे तत्पर रहते हैं। किसी के घर में विवाह जैसा मंगल कार्य हो या कोई दुःखद घड़ी, ठाकुर साहब की उपस्थिति वहां अनिवार्य रूप से रहती है। वह वास्तव में 'दिल के धनी' हैं, जो छोटों को पिता समान स्नेह और बड़ों को सदैव चरण-स्पर्श का सम्मान देते हैं। उनके चेहरे का तेज और आंखों की चमक उनके व्यक्तित्व की सच्चाई और अंतरात्मा की पवित्रता को दर्शाती है।
*राजनीति में सेवा का नया अध्याय*
राजनीति ठाकुर चरणसिंह जी के लिए सत्ता प्राप्ति का साधन नहीं, बल्कि जनसेवा का एक माध्यम है। उन्होंने राजनीति में कदम रखा, तो अपने सिद्धांतों और नैतिकता के दम पर। उन्होंने साबित किया कि राजनीति में भी शुचिता और ईमानदारी को जीवित रखा जा सकता है।
राजनीति में आपकी पकड़ और व्यक्तित्व का एक अलग ही रूप देखने को मिलता है। अपने सिद्धांतों के दम पर आपने राजनीति में कदम रखा और एक नई पहचान बनाई। संघर्षों से तपकर निखरे आपके जीवन ने वर्ष 2022 के सरपंच चुनाव में एक नया इतिहास रच दिया।
ऐतिहासिक जीत का वो मंजर वर्ष 2022 का सरपंच चुनाव मामटखेड़ा के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया। उनके संघर्षों से तपकर निखरे जीवन ने उस चुनाव में एक नया इतिहास रच दिया।
*“वह ऐतिहासिक जीत: जब मामटखेड़ा नहीं सोया था”*
वह जीत सिर्फ एक चुनाव की जीत नहीं थी, वह जीत थी 'कांच के गिलास' में झलकते गाँव के अटूट विश्वास की। वह जीत थी सत्य, सेवा और समर्पण की।
उस जीत का मंजर आज भी गाँव वालों की आंखों में बसा है। ऐसा महसूस हो रहा था मानो पूरा मामटखेड़ा खुशियों से सराबोर है और आसमां से फूलों की बारिश हो रही हो। आधी रात का वक्त था, लेकिन उत्साह सातवें आसमान पर था। हर गली, हर मोहल्ले में, बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक, सब अपने लाड़ले ठाकुर साहब का इंतजार कर रहे थे।
इतिहास में शायद पहली बार ऐसा माहौल बना था कि खुशी के आंसू थम नहीं रहे थे। उस रात मामटखेड़ा सोया नहीं था; ढोल-धमाकों की गूंज, पटाखों की रोशनी और गुलाल से सजी गलियां ऐसी लग रही थीं जैसे कोई दुल्हन सजी हो।
जब ठाकुर साहब पूरे गाँव का आशीर्वाद लेकर अपने घर की देहरी पर पहुँचे, तो दृश्य और भी भावुक कर देने वाला था। उनकी माताजी, धर्मपत्नी और बच्चे आरती की थाली और आंखों में खुशी के आंसू लिए द्वार पर खड़े थे। वह सुबह एक नए युग की शुरुआत थी।
*एक आदर्श नेतृत्व की प्रतिज्ञा*
उस दिन से लेकर आज तक, ठाकुर चरणसिंह जी 'सबका साथ, सबका विकास' की मूल भावना के साथ निरंतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने गाँव को एक नया विजन दिया है। वह एक कुशल नागरिक, एक नेक इंसान और एक सजग नेता के रूप में मामटखेड़ा को प्रगति के शिखर पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनके बारे में लिखना 'सूरज को दीया दिखाने' जैसा है, क्योंकि उनकी अच्छाइयां इतनी हैं कि उन्हें शब्दों में समेटना मुश्किल है।
*(इस इतिहासिक जीत मे आपके दोनो भाइयो का भी बहुत बड़ा योगदान रहा हे, बड़े भाई साहब ठा. विक्रम सिंह जी ओर छोटे भाई ठा. चेतन सिंह जी । इन्होने ये साबित कर दिया की भाई भाई की भुजा होती हे। आपका आपसी प्रेम हमेशा इसी प्रकार बना रहे ।)*
*काविता* *॥ संघर्ष से जननायक तक ॥*
मध्यम वर्गीय आँगन का, जो जन्मा एक लाल था,
संघर्षों की भट्ठी में तपकर, बना व्यक्तित्व विशाल था।
मामटखेड़ा की मिट्टी का, वो असली सा मान है,
ठाकुर चरणसिंह राठौड़ जी, हर समाज की शान है।
सरलता की मूरत हैं वो, और सेवा का जज्बात लिए,
अपनों की खातिर खड़े सदा, हाथों में हाथ लिए।
थमा जब हाथों में उनके, वो 'कांच का गिलास' था,
उसी में छलका गाँव का, अटूट विश्वास था।
साल 'बाइस' का वो मंजर, वो ऐतिहासिक जीत का दौर,
खुशियों की गूँज थी हर तरफ, मची थी चारों ओर।
आधी रात को गलियों में, जो हुआ था वो सत्कार,
साफे और मालाओं के साथ, गूँजा था जय-जयकार।
छोटों को देते प्यार सदा, और बड़ों को भरपूर सम्मान,
सेवा और विकास ही अब, बन गया इनका ईमान।
माँ रोग्या देवी का आशीष, रहे आप पर हर पल,
लिखते रहेंगे 'राज' यूँ ही, आपके विकास के मंगल।
*प्रार्थना:*
माँ रोग्या देवी का आशीर्वाद और कृपा आप पर सदैव बनी रहे। आप जीवन में और भी बड़े मुकाम हासिल करें, राष्ट्र सेवा में अपना योगदान दें और हमेशा स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें। यही हमारी माँ भगवती से मंगल कामना है।
*।। जय माता जी ।।*
*आपका छोटा भाई,*
*राहुल पंवार (राज)*
*मामटखेड़ा, रतलाम*
*मो. 9669673108*
🙏