वैश्विक पटल पर वर्तमान परिदृश्य पर गंभीरता पूर्वक चिंतन करते हुए भोगौलिक प्राकृतिक संसाधनों पर संरक्षण संवर्धन की आवश्यकता..!
भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का मूल आधार श्रुति - स्मृति आधारित ज्ञान ज्योति को मन-मस्तिष्क चेतना में शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षा, स्वस्थ, पर्यावरण, खगोलीय घटनाएं गतिविधियों में शोध अनुसंधान की अद्भुत सृजन शक्ति सामाजिक गतिविधियों में समन्वय स्थापित करते हुए अतीत और भविष्य के बीच सद्भावना सशक्त ज्ञान ज्योति आत्मिक चेतना को समर्पित ऋषि, मुनि, महर्षि ने जीवन को जीवंत बनाए रखने में ईश्वरीय सत्ता शक्ति एहसास में चिंतन अध्ययन प्रायोगिक ध्यान, योग, योगासन की अद्भुत शक्ति का आधार वर्तमान समय में विश्व पटल पर अपनी अस्तित्व को दर्ज कराया ठीक उसी प्रकार खगोलीय घटनाएं में वेद-वेदांत पुराण में नैनो टेक्नोलॉजी द्वारा विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान वैज्ञानिकों ने सकारात्मक परिणाम जनहित में दिखाई दे रहा है।
ठीक उसी प्रकार हमें पर्यावरण,वृक्षारोपण, जलसंरक्षण पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करते हुए आधुनिक संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण संवर्धन में न्यायिक सुरक्षा संरक्षण शैक्षणिक संस्थानों में समानता और संतुलन पूर्ण शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार सृजन कृषि विकास ही भारतीय लोकतंत्रात्मक राष्ट्रीय एकीकरण संस्कृति संरक्षण संवर्धन विकास में लोकतांत्रिक व्यवस्था सुदृढ़ सुचारू संचालन में कहीं ना कहीं आध्यात्मिक चेतना एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण का आधार वेदांत दर्शन सिद्धांत का मूल सार है कहना अन्यथा ना होगा।
कृष्ण कुमार पाठक
लेखक/पत्रकार