गरीब मज़दूरों का खून-पसीना
कई बड़ी इमारतें, हवेलियाँ और आलीशान ज़िंदगी
गरीब मज़दूरों का खून-पसीना
कई बड़ी इमारतें, हवेलियाँ और आलीशान ज़िंदगी असल में गरीब मज़दूरों के खून-पसीने से बनती हैं जो धूप और बारिश में खड़े होकर, ईंटें उठाते हैं और सीमेंट मिलाते हैं, लेकिन जब वह इमारत बन जाती है, तो अक्सर उन्हें उसमें घुसने या उससे गुज़रने की भी इजाज़त नहीं होती। यह न सिर्फ़ गैर-बराबरी की निशानी है, बल्कि समाज में चल रहे क्लास बँटवारे की भी साफ़ तस्वीर है। आजकल लोग सिर्फ़ कारों, छुट्टियों, पार्टियों के चमचमाते पार्ट्स दिखाते हैं लेकिन उनके पीछे की मेहनत, टेंशन, नाकामियों को छिपा लेते हैं। इससे आम आदमी में यह झूठी भावना पैदा होती है कि सब कुछ आसान है, और वह नाकामयाब महसूस करने लगता है। लेकिन असल में, कामयाबी का रास्ता बहुत मुश्किल होता है, और ज़्यादातर लोगों ने खुद या अपने परिवार वालों ने मेहनत की होती है। और आख़िरी बात यह है कि असली दौलत तो दिल की होती है। घर, कार, पैसा, सब कुछ आता-जाता रहता है, लेकिन अच्छे काम, अच्छा इंसाफ़ और गरीबों को इज़्ज़त देने वाले काम, वे अमर हो जाते हैं। अगर हम अपने आस-पास के मेहनतकश भाइयों को गर्व से देखें, उनकी मदद करें, उन्हें इंसान समझें, तभी हम सही मायने में अमीर हैं। अगर आप चाहें तो हम इस टॉपिक पर और बात कर सकते हैं, यह आवाज़ ज़रूरी है।
धन्यवाद 🙏🏻
✍🏿🍳हरबंस सिंह सलाहकार🙏🏻
शहीद भगत सिंह प्रेस एसोसिएशन पंजाब
मोबाइल +918054400953