नई बस्ती शिव मंदिर से पूर्णागिरि धाम को निकली भव्य अखंड ज्योति पदयात्रा, जयकारों से गूंजा कस्बा
फतेहगंज पश्चिमी (बरेली)। कस्बे की नई बस्ती स्थित प्राचीन शिव मंदिर से शनिवार को मां पूर्णागिरि धाम के लिए अखंड ज्योति पदयात्रा भक्ति और उत्साह के साथ रवाना हुई। सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में निकली इस यात्रा ने पूरे कस्बे को भक्तिमय माहौल में रंग दिया।
सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर मां का आशीर्वाद लिया गया और अखंड ज्योति के साथ पदयात्रा का शुभारंभ हुआ। जैसे ही यात्रा आगे बढ़ी, “जय माता दी” के गगनभेदी जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो उठा। ढोल-नगाड़ों की थाप पर श्रद्धालु नाचते-गाते हुए आगे बढ़ते नजर आए।
पदयात्रा में शामिल भक्तों के हाथों में ध्वज और धार्मिक पताकाएं लहराती रहीं, वहीं कई श्रद्धालु माथे पर लाल चुनरी बांधे मां के जयकारे लगाते चल रहे थे। महिलाओं की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही, जिन्होंने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ यात्रा में हिस्सा लिया। विशेष रूप से कई भक्त अखंड ज्योति लेकर मां पूर्णागिरि के दरबार के लिए रवाना हुए।
जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत
यात्रा जब लोधीनगर चौराहे पर पहुंची तो सभासद प्रदीप गुप्ता समेत स्थानीय व्यापारियों और कस्बावासियों ने पुष्पमालाएं पहनाकर एवं पुष्पवर्षा कर यात्रियों का जोरदार स्वागत किया। इससे श्रद्धालुओं का उत्साह और भी बढ़ गया।
पुलिस रही मुस्तैद, शांति से संपन्न हुई यात्रा
पदयात्रा को शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। चौकी प्रभारी अनूप सिंह के नेतृत्व में हेड कांस्टेबल विपिन कुमार, कांस्टेबल अक्षय कुमार, आदेश कुमार सहित अन्य पुलिसकर्मी मुस्तैदी के साथ तैनात रहे। उनकी निगरानी में यात्रा सुचारु रूप से आगे बढ़ी।
आस्था के साथ एकता का संदेश
इस अवसर पर महंत सुजल राठौर, जगदीश राठौर, वीरेंद्र राठौर, रामू राठौर, सुशील सिंह, राकेश राठौर, जयप्रकाश शर्मा, रामचंद्र राठौर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने मां पूर्णागिरि से क्षेत्र की खुशहाली, समृद्धि और शांति की कामना की।
हर वर्ष की भांति इस बार भी निकली यह पदयात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बनी, बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश भी देती नजर आई। यात्रा के दौरान पूरे कस्बे में भक्ति का माहौल छाया रहा और जयकारों की गूंज देर तक सुनाई देती रही।