“हजारों की भीड़ ने दी विदाई… बहुजन समाज पार्टी के लोकप्रिय कार्यकर्ता युवराज रात्रे की अंतिम यात्रा जनसैलाब में तब्दील”
चित्रसेन घृतलहरे, AIMA MEDIA //सरसींवा (सारंगढ़–बिलाईगढ़)://बहुजन समाज पार्टी के समर्पित एवं लोकप्रिय कार्यकर्ता युवराज रात्रे के निधन की खबर से पूरा क्षेत्र शोक में डूब गया। ग्राम करियारवार (टिहलीपाली) में निकली उनकी अंतिम यात्रा एक अद्वितीय और ऐतिहासिक जनसैलाब का रूप ले ली, जहां हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। यह दृश्य सिर्फ एक अंतिम संस्कार नहीं था, बल्कि एक जननायक के प्रति समाज के अटूट विश्वास, सम्मान और प्रेम का जीवंत प्रमाण बन गया।
अंतिम यात्रा में बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम टंडन, प्रदेश महासचिव डॉ. रोहित डहरिया सहित सारंगढ़–बिलाईगढ़ जिले के सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए। इसके अलावा विभिन्न सामाजिक संगठनों, सर्वसमाज के प्रतिनिधियों और कई राजनीतिक दलों के लोगों ने भी बड़ी संख्या में उपस्थित होकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
नीले कफन में लिपटे युवराज रात्रे के पार्थिव शरीर के साथ निकली अंतिम यात्रा में डीजे की श्रद्धांजलि धुनें गूंजती रहीं, जिसने पूरे माहौल को भावनाओं से भर दिया। रास्तेभर लोग दोनों ओर खड़े होकर पुष्प अर्पित करते रहे। नम आंखों से दी गई विदाई ने पूरे क्षेत्र को शोकाकुल कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार लगभग 3 हजार से अधिक लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए, जो अपने आप में एक अभूतपूर्व दृश्य था। यह भीड़ केवल संख्या नहीं, बल्कि युवराज रात्रे के प्रति समाज के गहरे स्नेह और उनके जीवनभर के संघर्षों व जनसेवा की बड़ी पूंजी को दर्शाती है।
श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि युवराज रात्रे सिर्फ एक राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं थे, बल्कि सामाजिक समरसता, जनसेवा और संघर्षशीलता की मिसाल थे। उनके सरल व्यवहार, निष्ठा और मिलनसार स्वभाव ने उन्हें हर वर्ग, हर समुदाय और हर विचारधारा के लोगों के दिलों में बसाया।
सामाजिक कार्यकर्ताओं, गणमान्य नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा—
“युवराज रात्रे का जाना क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि सच्ची सेवा, ईमानदारी और मानवीय मूल्यों से बढ़कर कोई संपत्ति नहीं होती। यही कारण है कि आज भी समाज उन्हें अमर सम्मान के साथ विदाई दे रहा है।”
युवराज रात्रे की अंतिम यात्रा ने यह साबित कर दिया कि एक सच्चे जनसेवक की पहचान उसके पद या संपत्ति से नहीं, बल्कि समाज के दिलों में उसके लिए बसे सम्मान, प्रेम और विश्वास से होती है।