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राजेश्वर भगवान के बताए मार्ग पर चलने का लिया संकल्प 144वीं जयंती पर उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

बेंगलूरु (दलपतसिंह भायल )श्री राजाराम आंजणा पटेल संघ, बेंगलूरु के तत्वावधान में कळबी आंजणा समाज के आराध्य राजेश्वर भगवान की 144वीं जयंती बड़े हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर पैलेस ग्राउंड स्थित प्रिंसेज श्राइन सभागार में दो दिवसीय भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में समाज के लोगों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः मागड़ी रोड स्थित संत राजाराम महाराज मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना एवं महाआरती के साथ हुई। इसके पश्चात मुख्य समारोह प्रिंसेज श्राइन सभागार में आयोजित किया गया, जहां आराध्य देव राजेश्वर भगवान के सुसज्जित दरबार के समक्ष दीप एवं ज्योत प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया और सभी ने कतारबद्ध होकर दर्शन कर ज्योत में नारियल अर्पित कर सुख-शांति की कामना की।
संघ के अध्यक्ष दुर्गाराम पटेल ने सभी अतिथियों एवं आगंतुकों का स्वागत किया। इस अवसर पर कर्नाटक राज्यपाल के ओएसडी शंकर गुर्जर, जय कर्नाटक संघ के प्रदेशाध्यक्ष जगदीश गौड़ा, इसरो के वैज्ञानिक मोहनराम मालवी तथा भाजपा प्रवासी संघ के अध्यक्ष रमेशकुमार पटेल का संघ द्वारा साफा, माला एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया।
समारोह में वक्ताओं ने समाज की एकजुटता और निरंतर प्रगति पर प्रकाश डालते हुए राजेश्वर भगवान के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज के विकास में शिक्षा का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है, इसलिए समाज को शिक्षा के क्षेत्र में और अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है। साथ ही युवाओं की प्रशासनिक एवं सामाजिक भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि संत राजेश्वर भगवान ने अपने उपदेशों के माध्यम से समाज को एक नई दिशा दी और आचार-विचार से एक विशिष्ट पहचान स्थापित की। उनके द्वारा वर्षों पूर्व दिए गए संदेश आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो रहे हैं।
कार्यक्रम के अंतर्गत संघ की साधारण सभा भी आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न चढ़ावों के लाभार्थियों का सम्मान किया गया। सचिव भीमाराम भूरिया ने कार्य प्रगति का विवरण प्रस्तुत किया, जबकि कोषाध्यक्ष मंगलाराम कोंदली ने आय-व्यय का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। उपाध्यक्ष कलाराम चौधरी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ सभा का समापन हुआ।
इस अवसर पर समाज के वरिष्ठजन, महिलाएं, युवा एवं बच्चों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में राजेश्वर सेवा मंडल एवं राजेश्वर महिला मंडल का विशेष सहयोग रहा।
समाज को शिक्षा का मूल मंत्र देकर गए राजेश्वर भगवान
राजेश्वर भगवान ने समाज को अज्ञानता से ज्ञान की ओर ले जाने का संदेश दिया। उन्होंने बच्चों की शिक्षा पर विशेष बल देते हुए समाज में व्याप्त कुरीतियों—जैसे बाल विवाह, मृत्यु भोज एवं नशे की प्रवृत्ति—के विरोध में जागरूकता फैलाई।
उन्होंने जाति, धर्म और रंग के भेदभाव को समाप्त करने का संदेश दिया और आत्मनिर्भरता के साथ एक शोषण-मुक्त समाज की स्थापना का मार्ग दिखाया। उनके उपदेश आज भी समाज को सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते

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