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गोगामेड़ी बागड़ धाम गांव का इतिहास

पत्रकार विनोद खन्ना गोगामेडी
📰 हनुमानगढ़ भास्कर | 30 जनवरी 2026
📍 पंचायतनामा – गोगामेड़ी
🔴 76 साल पहले सरकार ने 600 मुरब्बा जमीन की थी अलॉट, गोगाजी के समाधि स्थल के कारण पड़ा नाम गोगामेड़ी
हनुमानगढ़ जिले की नोहर तहसील से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित गांव गोगामेड़ी का इतिहास काफी रोचक है। करीब 76 वर्ष पहले इस क्षेत्र में घना जंगल हुआ करता था। वर्ष 1956 में सरकार द्वारा यहां 600 मुरब्बा जमीन का आवंटन किया गया, जिसके बाद धीरे-धीरे यहां आबादी बसनी शुरू हुई।
सबसे पहले यहां विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 60 राजपूत, बनिया और नाई परिवार आकर बसे। उस समय यहां गोगाजी की छोटी सी मढ़ी हुआ करती थी। गोगाजी के समाधि स्थल के कारण ही इस गांव का नाम गोगामेड़ी पड़ा।
समय के साथ गांव का विकास होता गया। वर्तमान में गांव की आबादी करीब 15,000 है। वर्ष 1995 में गोगामेड़ी को पहली बार पंचायत का दर्जा मिला। इससे पहले यह गांव किस्मीदेसर पंचायत के अंतर्गत आता था।
📊 पंचायत का लेखा-जोखा:
जनसंख्या: 15,000
साक्षरता दर: 70%
जिला मुख्यालय से दूरी: 120 किमी
प्रमुख आयोजन: गोगामेड़ी मेला
गांव में शिक्षा के क्षेत्र में भी काफी विकास हुआ है। वर्ष 1960 में यहां पहला प्राथमिक विद्यालय खोला गया था। वर्तमान में गांव में 9 सरकारी स्कूल संचालित हैं, जिनमें 2 सीनियर सेकेंडरी और 7 मिडिल स्कूल शामिल हैं।
गोगामेड़ी धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां गोगाजी का प्रसिद्ध मेला भरता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। मेले के दौरान यहां व्यापार भी होता है, जिससे ग्रामीणों को रोजगार के अवसर मिलते हैं।
आज गोगामेड़ी राजस्थान के प्रमुख आस्था स्थलों में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है और निरंतर विकास की ओर अग्रसर है।

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