अगर मरीज इमरजेंसी वार्ड में आया है तो पहले ट्रीटमेंट शुरू करना चाहिए न कि पहले पर्सी पर नंबर लिखवाओ
जोधपुर स्थित मथुरादास माथुर अस्पताल की इमरजेंसी सेवाओं को लेकर हाल ही में सामने आई लापरवाही की घटनाएँ बेहद चिंताजनक और निंदनीय हैं। इमरजेंसी विभाग किसी भी अस्पताल की सबसे महत्वपूर्ण इकाई होती है, जहाँ हर सेकंड कीमती होता है और त्वरित, संवेदनशील तथा प्रभावी उपचार की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में यदि वहाँ अव्यवस्था, स्टाफ की कमी, या मरीजों के प्रति उदासीन रवैया देखने को मिलता है, तो यह सीधे-सीधे मानव जीवन के साथ खिलवाड़ है।
मरीज और उनके परिजन बड़ी उम्मीदों के साथ अस्पताल पहुँचते हैं, लेकिन यदि उन्हें समय पर इलाज न मिले या अनदेखी का सामना करना पड़े, तो यह न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि प्रशासन की जिम्मेदारी पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है। ऐसी घटनाएँ समाज में भय और अविश्वास का माहौल पैदा करती हैं, जो किसी भी विकसित स्वास्थ्य प्रणाली के लिए अत्यंत हानिकारक है।
इस प्रकार की लापरवाही को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता साथ ही, अस्पताल प्रबंधन को अपनी इमरजेंसी सेवाओं की कार्यप्रणाली की समीक्षा कर आवश्यक सुधार करने चाहिए, ताकि मरीजों को समय पर और बेहतर इलाज मिल सके।
स्वास्थ्य सेवाओं में संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और तत्परता अनिवार्य है। मथुरादास माथुर अस्पताल जैसी प्रमुख संस्था से लोगों की अपेक्षाएँ और भी अधिक होती हैं, इसलिए वहाँ इस प्रकार की लापरवाही की कड़े शब्दों में निंदा की जानी चाहिए और सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।