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कामदा एकादशी कब है? जानिए 2026 की तिथि, समय और व्रत के नियम

🪔 कामदा एकादशी 2026: महत्व, तिथि, पूजा विधि और पूरी जानकारी

सनातन धर्म में एकादशी का विशेष महत्व है, और उन्हीं में से एक है कामदा एकादशी, जो भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत पवित्र व्रत माना जाता है।
साल 2026 में यह पावन व्रत 29 मार्च (रविवार) को रखा जाएगा।

यह दिन भक्तों के लिए सिर्फ व्रत रखने का नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि, भक्ति और भगवान से जुड़ने का अवसर होता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर व्यक्ति के पापों का नाश होता है और उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

📿 कामदा एकादशी का धार्मिक महत्व

पुराणों के अनुसार, कामदा एकादशी का व्रत रखने से:
• पिछले जन्मों के पाप भी नष्ट हो जाते हैं
• जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है
• भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है

यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है, जो मन की इच्छाओं की पूर्ति और कष्टों से मुक्ति चाहते हैं।
इसी वजह से इसे “कामना पूरी करने वाली एकादशी” भी कहा जाता है।

📅 कामदा एकादशी 2026: सही तिथि और समय
• एकादशी तिथि प्रारंभ: 28 मार्च 2026, सुबह 08:45 बजे
• एकादशी तिथि समाप्त: 29 मार्च 2026, सुबह 07:46 बजे
• व्रत रखने की तिथि: 👉 29 मार्च 2026
• पारण (व्रत खोलने का समय): 30 मार्च 2026, सुबह 06:14 से 07:09 बजे तक

👉 ध्यान रखें:
एकादशी का व्रत हमेशा उस दिन रखा जाता है, जब सूर्योदय के समय एकादशी तिथि होती है — इसलिए इस बार व्रत 29 मार्च को ही रखा जाएगा।

🙏 पूजा विधि (Step-by-step)

अगर आप इस व्रत को पूरी श्रद्धा से करना चाहते हैं, तो इस विधि का पालन करें:
1. सुबह जल्दी उठें और स्नान करके शरीर व मन को शुद्ध करें
2. घर के मंदिर या पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें
3. एक चौकी पर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें
4. घी का दीपक जलाएं और अगरबत्ती लगाएं
5. भगवान को पीले फूल, फल, सूखे मेवे और तुलसी दल अर्पित करें
6. “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें
7. एकादशी व्रत कथा का पाठ करें
8. अंत में श्रद्धा और भक्ति के साथ आरती करें

व्रत के नियम
• इस दिन अन्न (चावल, गेहूं) का सेवन नहीं किया जाता
• केवल फल, दूध, सूखे मेवे या साबूदाना लिया जा सकता है
• कुछ भक्त निर्जला व्रत (बिना पानी) भी रखते हैं
• मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहने का प्रयास करें

🌼 कामदा एकादशी की कथा (संक्षेप में)

पुराणों के अनुसार, एक समय रत्नपुर नगर में ललित नामक गंधर्व और उसकी पत्नी ललिता रहते थे।
एक बार गलती से ललित को श्राप मिल गया और वह राक्षस बन गया।
तब उसकी पत्नी ने एक ऋषि के कहने पर कामदा एकादशी का व्रत रखा, जिससे उसके पति को श्राप से मुक्ति मिल गई।

👉 इस कथा से यह संदेश मिलता है कि
सच्ची श्रद्धा और भक्ति से हर संकट दूर हो सकता है।

👉 सरल शब्दों में समझें
• 28 मार्च → तिथि शुरू
• 29 मार्च → व्रत रखा जाएगा
• 30 मार्च → व्रत खोला जाएगा (पारण)

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