राजस्थान:-कोटा जैसे कोचिंग हब्स में हर 6वाँ छात्र फेल हो रहा है।
कोटा जैसे कोचिंग हब्स में last year का कक्षा 12 का परिणाम एक चेतावनी की घंटी है। JEE और NEET की तैयारी कर रहे लगभग 16% छात्र फेल (या कम्पार्टमेंट) हो गए हैं। कोचिंग संस्थान चाहें तो सटीक आँकड़े साझा कर सकते हैं, लेकिन अफ़सोस की बात है कि केवल टॉपर्स की तस्वीरें ही दिखाई जाएँगी। ध्यान इस बात पर ज्यादा रहता है कि कितने छात्रों ने JEE में 100 पर्सेंटाइल स्कोर किया। ज़रा सोचिए — JEE या NEET की तैयारी कर रहा एक छात्र कक्षा 12 बोर्ड में फेल हो रहा है। यह हर 6 में से 1 छात्र के साथ हो रहा है जो कोचिंग का हिस्सा है।
असल वजह क्या है?
कक्षा 11 में एक भी सब्जेक्टिव टेस्ट नहीं होता। कक्षा 11 के बेसिक टॉपिक्स जैसे त्रिकोणमिति और कैल्कुलस, जो कक्षा 12 की नींव बनाते हैं, कमजोर रह जाते हैं। इसी तरह जो छात्र फिजिक्स में मैकेनिक्स को अच्छे से नहीं समझ पाता, वह कक्षा 12 में संघर्ष करता है। कक्षा 12 में भी कोचिंग में सब्जेक्टिव टेस्ट बहुत देर से शुरू होते हैं। बोर्ड जैसी लिखने की आदत कभी विकसित ही नहीं हो पाती।
छात्रों को कक्षा 11 की वार्षिक परीक्षा देने तक के लिए प्रेरित नहीं किया जाता। इसका परिणाम यह होता है कि parents और छात्र दोनों ही अंधेरे में रहते हैं। न कोई वास्तविक अंतिम परीक्षा होती है, और जो परीक्षा के पेपर और कॉपियाँ घर भेजी जाती हैं, वे सिर्फ “fill up” के लिए होती हैं — छात्र अक्सर ChatGPT जैसी मदद से answer sheet भर देते हैं। लगभग 90% कोचिंग छात्रों के लिए कक्षा 11 की परीक्षा इसी तरह एक औपचारिकता बनकर रह जाती है।
जिन स्कूलों में कक्षा 12 में लगभग 20% छात्र फेल हो जाते हैं, वहीं कक्षा 11 में एक भी छात्र फेल नहीं होता। अगर पिछले 5 साल का कोई भी रैंडम सैंपल लेकर कक्षा 11 और 12 के मार्कशीट की तुलना की जाए, तो सच्चाई साफ दिख जाएगी।
अंत में parents से निवेदन है इस पर जरूर ध्यान दें।