कनॉट प्लेस पार्किंग में करोड़ों का खेल! एनडीएमसी पर मिलीभगत के आरोप
दिल्ली से ब्यूरो चीफ राजीव द्विवेदी
नई दिल्ली। राजधानी के सबसे व्यस्त व्यावसायिक केंद्र कनॉट प्लेस की पार्किंग व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। यहां आने वाले लोगों के लिए हर ब्लॉक में पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था तो है,
लेकिन पार्किंग शुल्क वसूली को लेकर बड़े स्तर पर गड़बड़ी के आरोप सामने आ रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, पहले कनॉट प्लेस की पार्किंग का संचालन एक निजी कंपनी के पास था, जिसकी अवधि पूरी होने के बाद एनडीएमसी (नई दिल्ली नगर परिषद) ने व्यवस्था अपने हाथ में ले ली। इसके बाद से ही कर्मचारियों और कुछ कथित तौर पर अवैध रूप से लगाए गए लोगों के जरिए पार्किंग शुल्क की वसूली की जा रही है।
आधा पैसा सरकारी खजाने में, बाकी का ‘बंटवारा’!
बताया जा रहा है कि पार्किंग शुल्क की वसूली में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हो रही हैं। सूत्रों का दावा है कि केवल आधी गाड़ियों का शुल्क ही आधिकारिक रूप से जमा किया जाता है, जबकि बाकी रकम का आपस में बंटवारा कर लिया जाता है। इस कथित खेल से हर महीने करोड़ों रुपये के सरकारी राजस्व के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
दो साल से जारी खेल, अधिकारी मौन
जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला पिछले करीब दो वर्षों से चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। आरोप है कि विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते इस पूरे मामले पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
टेंडर प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
सूत्रों का कहना है कि नई पार्किंग मैनेजमेंट प्रणाली लागू करने के नाम पर बार-बार टेंडर जारी किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई पारदर्शी प्रक्रिया सामने नहीं आई। इस पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर टेंडर प्रक्रिया में देरी क्यों की जा रही है।
नई सरकार से थी उम्मीद, लेकिन हालात जस के तस
नई सरकार के गठन के बाद लोगों को उम्मीद थी कि इस तरह के कथित नेक्सस पर लगाम लगेगी और पारदर्शी व्यवस्था लागू होगी, जिससे सरकार को अधिकतम राजस्व प्राप्त होगा। लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए ऐसा होता नहीं दिख रहा है।
एमसीडी टोल की तरह बढ़ती जा रही अवधि
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला एमसीडी टोल की तरह बनता जा रहा है, जहां बिना ग्लोबल टेंडर के बार-बार अवधि बढ़ाने के आरोप लगे थे। ऐसे में कनॉट प्लेस पार्किंग व्यवस्था पर भी पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या राजधानी के इस अहम इलाके में पार्किंग व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जा सकेगा या नहीं।