देलवाड़ा ब्लॉक में एसएचजी की 30 महिलाएं बना रही एम्ब्रॉयडरी वर्क के उत्पाद
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कलक्टर अरुण कुमार हसीजा की एम्ब्रॉयडरी आर्टिजन महिलाओं से मुलाकात
कहा- राजसमंद के एम्ब्रॉयडरी वर्क को देश-प्रदेश में दिलाएंगे पहचान, सहयोग का दिया भरोसा
देलवाड़ा ब्लॉक में एसएचजी की 30 महिलाएं बना रही एम्ब्रॉयडरी वर्क के उत्पाद
राजसमंद, 27 मार्च। जिले में राजीविका स्वयं सहायता समूह के माध्यम से एम्ब्रॉइडरी कार्य महिलाओं के सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। जिला कलक्टर अरुण कुमार हसीजा द्वारा स्वयं सहायता समूह से जुड़ी उद्यमी महिला दुर्गा यादव द्वारा निर्मित एम्ब्रॉइडरी उत्पादों का अवलोकन कर उनके कार्य की सराहना की गई। इस अवसर पर कहा गया कि इस प्रकार के नवाचारपूर्ण कार्यों से ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बन रही हैं।
जानकारी के अनुसार देलवाड़ा ब्लॉक की महिलाओं द्वारा एम्ब्रॉइडरी कार्य को संगठित रूप में अपनाया गया है। यहां निर्मित उत्पादों में कुर्तियां, बेडशीट, टॉप, दुपट्टे, साड़ी, शर्ट सहित विभिन्न परिधान शामिल हैं, जिनकी मांग राजस्थान के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी बनी हुई है। इससे महिलाओं को ग्रामीण परिवेश में ही स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं और उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो रही है।
डीपीएम डॉ सुमन अजमेरा ने बताया कि राजीविका से जुड़े संयोगिनी उत्पादक समूह की लगभग 30 महिलाएं वर्तमान में एम्ब्रॉइडरी कार्य में सक्रिय रूप से संलग्न हैं। ये महिलाएं दुर्गा यादव के मार्गदर्शन में कार्य करते हुए न केवल पारंपरिक कला को आगे बढ़ा रही हैं, बल्कि आधुनिक डिजाइन और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद भी तैयार कर रही हैं। दुर्गा यादव द्वारा महिलाओं को प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें रोजगार से जोड़ा गया है, जिससे समूह आधारित आजीविका का सशक्त मॉडल विकसित हुआ है।
एम्ब्रॉइडरी कार्य के अंतर्गत कुर्ते, साड़ी, टॉप, दुपट्टे, स्टॉल, कॉफ्तान एवं अन्य परिधानों का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही नवाचार करते हुए राजस्थानी शैली की बेडशीट (गुदड़ी) तैयार की जा रही है, जिसमें मंगलगिरी फैब्रिक, मिरर वर्क, थ्रेड वर्क, पैच वर्क एवं एप्लीक वर्क का आकर्षक संयोजन किया गया है। इन उत्पादों की गुणवत्ता एवं डिजाइन के कारण बाजार में अच्छी मांग बनी हुई है।
राजीविका प्लेटफॉर्म के माध्यम से समूह की महिलाएं विभिन्न मेलों एवं प्रदर्शनी में भाग लेकर अपने उत्पादों का विपणन कर रही हैं। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई है, बल्कि उन्हें व्यापक बाजार से जुड़ने का अवसर भी मिला है। दुर्गा यादव ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आर्थिक प्रगति की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है और वे ‘लखपति दीदी’ बनने के साथ-साथ अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनकर उभरी हैं।
उनसे प्रेरित होकर देलवाड़ा क्षेत्र की अन्य महिलाएं भी इस कार्य से जुड़ रही हैं और समूह आधारित उत्पादन गतिविधियों के माध्यम से अपनी आजीविका सुदृढ़ कर रही हैं। इस पहल से ग्रामीण क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा मिल रहा है।
जिला प्रशासन द्वारा इस प्रकार की गतिविधियों को प्रोत्साहित करते हुए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से मजबूत होकर समाज में सशक्त भूमिका निभा सकें।