UPSSSC AGTA भर्ती में आरक्षण पर आर-पार: 'पिछड़ों-दलितों के हक पर डकैती' का आरोप, तूफानी सरोज और नीरज पहलवान ने फूँका बिगुल
जौनपुर/लखनऊ | 27 मार्च, 2026
उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) द्वारा कृषि विभाग में तकनीकी सहायक (AGTA) के 2759 पदों पर निकाली गई भर्ती अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन का रूप लेती दिख रही है। समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज के नेताओं ने इस भर्ती में संवैधानिक आरक्षण नियमों की कथित अनदेखी को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
आंकड़ों का खेल: आरक्षण के नाम पर 'साजिश' का दावा
आरोप है कि उत्तर प्रदेश की तय आरक्षण व्यवस्था (OBC- 27%, SC- 21%, ST- 2%) को इस विज्ञापन में दरकिनार कर दिया गया है। आंकड़ों के जरिए सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं:
OBC वर्ग: संवैधानिक रूप से 745 सीटें मिलनी चाहिए थीं, लेकिन विज्ञापन में मात्र 573 दी गईं।
SC वर्ग: 579 सीटों के हक के बदले केवल 213 सीटें आवंटित की गईं।
ST वर्ग: 55 सीटों की जगह महज 06 सीटों पर समेट दिया गया।
नेताओं का कहना है कि यह पिछड़ों और अनुसूचित वर्ग को सरकारी नौकरियों से बाहर करने की एक "सोची-समझी साजिश" है, जो सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है।
जनप्रतिनिधियों के कड़े तेवर: 'सड़क से सदन तक होगी लड़ाई'
इस विवाद में क्षेत्रीय दिग्गजों के कूदने से मामला गरमा गया है:
विधायक तूफानी सरोज (केराकत): क्षेत्रीय विधायक तूफानी सरोज ने सरकार को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि, "यदि इस विज्ञापन में तत्काल सुधार कर आरक्षण विसंगतियों को दूर नहीं किया गया, तो हम चुप नहीं बैठेंगे। इस अन्याय के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष किया जाएगा।"
विधानसभा अध्यक्ष (सपा) नीरज पहलवान: समाजवादी पार्टी के नेता नीरज पहलवान ने हुंकार भरते हुए कहा, "मैं पिछड़ों और अनुसूचित समाज के हिस्से की लड़ाई लड़ूँगा। हमारे समाज के संवैधानिक अधिकारों पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
प्रमुख माँगें और अल्टीमेटम
समाजवादी पार्टी और पीड़ित अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री कार्यालय (@CMOfficeUP) से निम्नलिखित माँगें की हैं:
भर्ती की तुरंत निष्पक्ष समीक्षा की जाए।
आरक्षण के निर्धारित प्रतिशत के अनुसार सीटों का पुनः निर्धारण हो।
नियमों के साथ खिलवाड़ करने वाले दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
चेतावनी: यदि सरकार ने अपनी नीतियों में सुधार नहीं किया, तो समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता और बहुजन समाज के लोग सड़कों पर उतरकर निर्णायक संघर्ष शुरू करेंगे।