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*सरकार आपदा, संकट और मुश्किल समय में एयरलाइंस, एंबुलेंस और ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं की "डायनामिक प्राइसिंग" को नियंत्रित करे।*

संजय यादव, माननीय सांसद, राजद
दिनांक- 27-03-2026

*सरकार आपदा, संकट और मुश्किल समय में एयरलाइंस, एंबुलेंस और ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं की "डायनामिक प्राइसिंग" को नियंत्रित करे।*

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राजद सांसद संजय यादव ने आज शून्यकाल में देश में आपदा, संकट और मुश्किल समय में एयरलाइंस, एंबुलेंस ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं की "डायनामिक प्राइसिंग" को नियंत्रित करने की मांग के अति महत्वपूर्ण मुद्दे पर आवाज उठाई।

संजय यादव ने कहा कि जब देश किसी भी प्रकार के संकट से गुज़रता है, जैसे कभी कोई आतंकी हमला, प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना का सामना करता है उस वक्त देश के नागरिक पहले से ही भय, पीड़ा, दर्द और असुरक्षा के भाव से गुज़र रहे होते हैं। उसी दौरान दुर्भाग्य से कुछ कंपनियाँ, विशेष रूप से एयरलाइंस और निजी परिवहन सेवाएँ इस आपदा को “मुनाफे” के अवसर में बदल देती हैं। यह दुख में शुद्ध रूप से अवसर तलाशने की निर्मम और निर्दयी मानसिकता है।

पहलगाम आतंकी घटना से पूरा देश चिंतित था, लोग डरे हुए थे, पर्यटक वहाँ से सुरक्षित जल्द से जल्द निकलना चाहते थे। लेकिन उसी समय क्या हुआ? श्रीनगर से दिल्ली की फ्लाइट का टिकट जो आम तौर पर ₹6,000 से ₹8,000 होता है, वह बढ़कर ₹65,000 तक पहुँच गया। एक परिवार जिसने अभी-अभी उस घटना का सामना किया हो गोलियों की आवाज सुनी हो, जो अपने बच्चों को लेकर किसी तरह सुरक्षित निकलना चाहता हो, उससे मजबूर कर दिया जाता है कि घर जाना है तो ₹50,000 दीजिए। मैं पूछना चाहता हूँ, क्या यह मानवता का व्यापार और अपमान नहीं है?

संजय यादव ने कहा कि यह केवल एक घटना नहीं है।यह पैटर्न बार-बार हर बार दिखाई देता है। प्राकृतिक आपदाओं, दुर्घटनाओं और संकट के समय जब लोग किसी क्षेत्र से तुरंत निकलना चाहते हैं, तब “डायनामिक प्राइसिंग” के नाम पर टिकट कई गुना महंगे हो जाते हैं। मतलब, जितना अधिक डर, उतना अधिक दोहन।

राजद सांसद ने सरकार से पूछा कि क्या यह संवेदनशील व्यवस्था है? क्या यह मानवीय व्यवस्था है? बाढ़ के दौरान राशन, तेल-पानी और जरूरी खाद्य पदार्थ कई गुना कीमत पर बिकने लगते है। Emergency के दौरान Surge pricing के नाम पर ऐप आधारित कैब सेवाएं और एंबुलेंस का किराया 4-5 गुना बढ़ा दिया जाता है?

हर वो चीज जो सरकार को आपदा में मानव को मुफ्त देनी चाहिये उस पर खुलेआम सरकार की आँखों के सामने इस कदर की लूट, डकैती सरकार की नाकामी और मिलीभगत लगती है। यह मरी हुई नैतिकता की पराकाष्ठा है। आज 146 करोड़ देशवासियों के सामने सबसे बड़ा सवाल सरकार की भूमिका को लेकर है कि इन सब मौकों पर सरकार कहाँ है? उसका स्टैंड क्या है?

संजय यादव ने कहा कि समस्या केवल आपदा तक ही सीमित नहीं है। दुर्भाग्य से यह मानसिकता अब भारत की रोज़मर्रा की व्यवस्था में भी दीमक की तरह घुस चुकी है। जब देश संकट में हो, जब लोग डरे हुए हों, खाद्य पदार्थों के दाम बेतहाशा बढ़ जाते है। कालाबाजारी, जमाखोरी और मुनाफाखोरी बढ़ जाती है। व्यापारी स्टॉक कर मुनाफा कमाने में लग जाते है। मतलब, जितनी अधिक मजबूरी, उतनी अधिक कीमत।

राजद सांसद ने कहा कि अगर किसी की मजबूरी से मुनाफ़ा कमाया जा रहा है, तो यह केवल आर्थिक समस्या नहीं है, यह हम सब कि एक नीतिगत और नैतिक विफलता है। क्या हम ऐसा भारत बनाना चाहते है? जहाँ आपदा में सेवा हो या आपदा में सौदा?जब देश और जनता संकट में होती है, तब सरकार की असली परीक्षा होती है, और साथ साथ वह तमाम कंपनियों की भी जो इस महान देश की महान जनता के दम से चलती हैं, महोदय भारत एक संवेदनशील लोकतंत्र है, संवेदना मरनी नहीं चाहिए !!!

संजय यादव ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि:-

1. देश में Crisis Fare Cap Law होना चाहिए जहाँ आपदा के समय टिकट, होटल, दवा, परिवहन पर अधिकतम मूल्य सीमा (Price Cap) लागू होनी चाहिए।

2. Automatic Fare Freeze कानून होना चाहिए। जैसे ही किसी क्षेत्र में आतंकवादी हमला, प्राकृतिक या अप्राकृतिक आपदा, बड़े पैमाने पर परिवहन संकट घोषित हो, एयरलाइन “Algorithm” को तुरंत फ्रीज कर दिया जाए।

3. आपदा के समय डायनामिक प्राइसिंग को अस्थायी रूप से रोक दिया जाए।

4. अगर कोई कंपनी संकट के समय अत्यधिक किराया वसूलती है तो उस पर भारी जुर्माना लाइसेंस कार्रवाई होनी चाहिए।

5. जैसे मेडिकल इमरजेंसी प्रोटोकॉल होता है, वैसे ही “राष्ट्रीय आपदा यात्रा” प्रोटोकॉल बनाया जाए।

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