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नौकरी छोड़ने पर 2 दिन में मिलेगी सैलरी, लीव और बोनस का पैसा, 1 अप्रैल से लागू होने जा रहा नया नियम

सरकार ने देश के सभी मजदूरों और कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग 29 श्रम कानूनों को मर्ज करके 4 नए लेबर कोड बनाए हैं. ये लेबर कोड 1 अप्रैल 2026 से लागू हो रहा है.

नए कोड से अनौपचारिक सेक्टर, गिग वर्कर्स, प्रवासी मजदूरों और महिलाओं को बेहतर वेतन, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य-सुरक्षा की फुल गारंटी मिलेगी. नए कोड से ग्रेच्युटी के नियम भी बदलेंगे. वहीं, नौकरी छोड़ने के 2 दिन के अंदर आपका फुल एंड फाइनल सेटलमेंट भी हो जाएगा. आइए जानते हैं क्या हैं नए लेबर कोड्स? इसमें फुल एंड फाइनल सेटलमेंट को लेकर क्या नियम है? नए कोड से बोनस और इंटेंसिव का क्या होगा? ग्रेच्युटी के कौन से नियम बदलेंगे और किसके लिए बदलेंगे?
क्या हैं नए लेबर कोड्स?

भारत में पहले 29 अलग-अलग लेबर लॉज थे. इन्हें लेकर लोगों में बहुत ज्यादा कंफ्यूजन था. इसलिए सहूलियत के लिए इन्हें 4 कोड्स में समेट दिया गया है. ये 4 कोड हैं-कोड ऑन वेजेज (2019), इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड (2020), कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी (2020) और OSHWC कोड (2020).

फुल एंड फाइनल सेटलमेंट को लेकर क्या नियम है?

नए लेबर नियमों के तहत अब कंपनियों को किसी भी एम्प्लॉयी का फुल एंड फाइनल (F&F) सेटलमेंट उसका नोटिस पीरिएड खत्म होने के सिर्फ 2 दिन के अंदर पूरा करना होगा. अभी तक फुल एंड फाइनल सेटलमेंट में 45 दिनों से ज्यादा का समय लगता है. लेकिन, 1 अप्रैल से अब सभी कंपनियों को F&F प्रोसेस 2 दिनों में पूरा करना जरूरी होगा.

इससे एम्प्लॉयी को क्या फायदा?

यह नियम खासतौर पर उन कर्मचारियों के लिए फायदेमंद है, जो नौकरी बदल रहे होते हैं. पहले F&F में देरी होने से उनकी फाइनेंशियल प्लानिंग बिगड़ जाती थी. कई बार नई नौकरी शुरू होने के बावजूद पुरानी कंपनी से पैसा नहीं मिलता था, जिससे परेशानी बढ़ती थी. अब नौकरी से इस्तीफा देने, नौकरी से निकाले जाने या लेऑफ की स्थिति में कंपनी को 2 दिन के अंदर सैलरी, लीव एन्कैशमेंट, बोनस, ग्रेच्युटी (अगर बनती है तो) चुकानी होगी.

बोनस और इंसेंटिव का क्या होगा?

लेऑफ या इस्तीफे के मामले में बोनस या इंसेंटिव तुरंत तय नहीं हो पाते. ऐसे कुछ वेरिएबल पेमेंट बाद में दिए जा सकते हैं. यह कंपनी की पॉलिसी पर निर्भर करेगा.

कंपनियों के लिए 2 दिन में सेटलमेंट करना कितना मुश्किल?

कंपनियों के लिए इसे लागू करना आसान नहीं होगा. F&F सेटलमेंट में जैसे अटेंडेंस चेकिंग, छुट्टियों का हिसाब, टैक्स कटौती और अलग-अलग विभागों से क्लियरेंस लेना पड़ता है. इसमें टाइम तो लगता ही है. 2 दिन में ये काम पूरे करने के लिए कंपनियों को सिस्टम और टाइम से बाहर जाकर भी काम करना पड़ सकता है.

फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए 1 साल में ग्रेच्युटी

फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है. पहले ग्रेच्युटी पाने के लिए लगातार 5 साल काम करना जरूरी था, लेकिन नए लेबर कोड में यह पात्रता घटाकर सिर्फ 1 साल कर दी गई है. यानी कि अब फिक्स्ड-टर्म या कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारी भी मात्र एक साल की सेवा के बाद ग्रेच्युटी पाने के हकदार होंगे, जिससे उन्हें पहले से अधिक सुरक्षा मिलेगी.

गिग वर्कर्स को सोशल सिक्योरिटी के साथ ग्रेच्युटी बेनिफिट भी

नए कोड्स में सोशल सिक्योरिटी को मजबूत किया गया है. इससे गिग (Gig)और प्लेटफॉर्म वर्कर्स जैसे उबर ड्राइवर या फूड डिलीवरी बॉय को हेल्थ इंश्योरेंस, एक्सीडेंट कवर और सोशल सिक्योरिटी मिलेगी. अब एम्प्लॉयर्स को वेज का 0.65% EDLI स्कीम में कंट्रीब्यूट करना होगा. इससे इन कर्मचारियों को लाइफ और डिसेबिलिटी कवरेज मिलेगा. नए कोड से अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर के वर्कर्स को पहली बार लाइफ इंश्योरेंस, ग्रेज्युटी और हेल्थ बेनिफिट मिलेंगे.

टैक्स-फ्री ग्रेच्युटी की लिमिट बढ़ी

नए कोड्स में टैक्स फ्री ग्रेच्युटी की लिमिट 20 लाख रुपये तक बढ़ाई गई है. पहले ये लिमिट 10 लाख रुपये थी.यानी कर्मचारी को ग्रेच्युटी का पूरा पैसा मिलेगा. साथ ही एम्प्लॉयर को ग्रेच्युटी 30 दिनों के अंदर पे करनी होगी. अगर देरी हुई, तो 10% सालना ब्याज लगेगा. इससे कंपनसेशन भी दोगुना तक हो सकता है. ये नियम प्राइवेट-पब्लिक सेक्टर दोनों में लागू होगा.

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