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जेएफटीए में 13वें छोटानागपुर नाट्य महोत्सव का शुभारंभ, तालियों की गूंज से सराबोर रहा उद्घाटन दिवस

जेएफटीए में 13वें छोटानागपुर नाट्य महोत्सव का गरिमामय शुभारंभ, तालियों की गूंज से सराबोर रहा उद्घाटन दिवस
रांची। विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर झारखंड फिल्म एंड थिएटर अकादमी (JFTA) के स्टूडियो थिएटर में आज 13वें छोटानागपुर नाट्य महोत्सव “कान्ति कृष्ण सम्मान” का भव्य एवं गरिमामय शुभारंभ हुआ। उद्घाटनकर्ता प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय पिठौरिया कि संचालिका बी के राजमती, वरिष्ठ रंगकर्मी कमल बोस,रीना सहाय, रिलेशंस के निदेशक आशुतोष द्विवेदी,राजीव सिन्हा, प्रवीण राजगढ़िया, ऋषिकेश लाल ने विशिष्ट अतिथियों के साथ संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर महोत्सव का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर सभागार दर्शकों से खचाखच भरा रहा और पूरे वातावरण में सांस्कृतिक उल्लास की झलक देखने को मिली।
युवा नाट्य संगीत अकादमी के तत्वावधान में आयोजित यह महोत्सव विगत 12 वर्षों से निरंतर रंगमंच की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कलाकारों को एक सशक्त मंच प्रदान करता आ रहा है। अपने 13वें संस्करण में यह आयोजन रांची की सांस्कृतिक पहचान के रूप में स्थापित हो चुका है।
उद्घाटन सत्र में प्रस्तुत नाटक “इंतकाम-ए-मुगले आजम” ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस नाटक के नाटककार केशव दुबे रहे, जबकि परिकल्पना एवं निर्देशन राजीव सिन्हा द्वारा किया गया। नाटक की प्रस्तुति जेएफटीए, रांची की ओर से की गई।
नाटक का कथानक सत्ता, प्रेम, संघर्ष और आत्मसम्मान जैसे गहन विषयों के इर्द-गिर्द बुना गया, जिसे कलाकारों ने सशक्त अभिनय, प्रभावी संवाद अदायगी एवं सजीव मंचन के माध्यम से जीवंत कर दिया। कलाकारों की ऊर्जा और निर्देशन की सटीकता ने ऐसा प्रभाव छोड़ा कि पूरा सभागार देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा, जो प्रस्तुति की सफलता का प्रमाण बना।
उद्घाटन सत्र के दौरान कई वरिष्ठ एवं नवोदित कलाकारों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस प्रकार के नाट्य महोत्सव कलाकारों को नई पहचान और ऊर्जा प्रदान करते हैं। उन्होंने इसे रांची में रंगमंच के सशक्त भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
यह चार दिवसीय नाट्य महोत्सव शहर के सांस्कृतिक परिदृश्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का कार्य कर रहा है। आयोजकों का मानना है कि यह आयोजन आने वाले समय में रांची के सांस्कृतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ेगा—क्योंकि कलाकारों का सम्मान ही समाज का वास्तविक सम्मान है।

इस अवसर पर मुख्य रूप से देवपूजन ठाकुर, अशोक गोप,ऋषिका कुमारी समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
कल (28 मार्च) का नाटक:
“कब्रिस्तान” — शाम 6:00 बजे

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