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दयालपुर, राजधानी दिल्ली… एक और मासूम ज़िंदगी नफ़रत और दरिंदगी की भेंट चढ़ गई।

दयालपुर, राजधानी दिल्ली… एक और मासूम ज़िंदगी नफ़रत और दरिंदगी की भेंट चढ़ गई।
हाफ़िज़-ए-क़ुरान सुब्हान मलिक… वो बेटा जो अपने माँ-बाप की आँखों का तारा था, आज हमेशा के लिए खामोश कर दिया गया।
एक माँ का लाल छीन लिया गया… 😭
जिसने उसे नौ महीने कोख में रखा, आज उसकी दुनिया उजड़ गई…
एक बाप की सारी उम्मीदें, सारे सपने, एक ही पल में टूट कर बिखर गए…
जिस बेटे को सहारा बनाना था, आज उसी का जनाज़ा उठाना पड़ रहा है…
कहते हैं उसकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी… फिर भी उसे बहाने से बुलाकर बेरहमी से चाकू मार दिया गया…
ये कैसी इंसानियत है? ये कैसा समाज बन रहा है हमारा?
अगर आज हम खामोश रहे… तो कल किसी और माँ का आंचल सूना होगा…
किसी और बाप की कमर टूटेगी…
हम सबकी आवाज़ बनना होगा…
इंसाफ़ की मांग करनी होगी…
सुब्हान मलिक के कातिलों को सख्त से सख्त सज़ा मिलनी चाहिए!
क्योंकि ये सिर्फ एक हत्या नहीं…
एक पूरा घर उजाड़ दिया गया है… 😭

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