परिवार ज्ञान की प्रथम पाठशाला
🔹 कड़वे प्रवचन 🔹
परिवार जिंदगी की प्रथम पाठशाला है। एक ऐसी पाठशाला जहां आदमी जन्म से मौत तक के आगोश तक कुछ न कुछ सीखता है। ज्ञान की पाठशालाएं तो एक समय के बाद रूक जाती हैं लेकिन जिंदगी की पाठशाला सतत चलती रहती है। जहां परवाह है वहां परिवार है और जहां परिवार है वहां हरिद्वार है। दरअसल परिवार वह कुम्हार है जिसके हाथों से ढ़लकर इंसान सही मायने में इंसान होता है और यही वो पाठशाला है जहां अपनों और परायों का ज्ञान होता है।
- मुनिश्री तरुण सागर जी महाराज