किडनी खराब होने से पहले जान लें ये जरूरी संकेत और बचाव
सोनीपत: भारत में क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) का बोझ दुनिया में सबसे अधिक में से एक है, लेकिन दुखद बात यह है कि बहुत कम लोगों को समय रहते अपनी किडनी की बीमारी के बारे में पता चल पाता है। अधिकांश मरीज तब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं जब किडनी की कार्यक्षमता काफी कम हो चुकी होती है। हर साल हजारों मरीजों को डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता पड़ती है, और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। हालांकि, उपलब्ध डायलिसिस सुविधाएं और ट्रांसप्लांट की संख्या जरूरत की तुलना में बहुत कम है, जिससे मरीजों और उनके परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ता है।
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग के नेफ्रोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट विभाग की एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. ब्लेसी सहगल ने बताया “भारत को “डायबिटीज कैपिटल” कहा जाता है और हमारी आबादी मेटाबोलिक रूप से मोटापे की ओर झुकी हुई है, भले ही कई लोग बाहर से पतले दिखें। ऐसे में CKD का खतरा और बढ़ जाता है। डायबिटीज हमारे देश में क्रॉनिक किडनी डिजीज का सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, ज्यादा नमक और प्रोसेस्ड जंक फूड का सेवन, बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयों का उपयोग, पेनकिलर्स का अधिक सेवन, और कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में भारी धातुओं व पर्यावरणीय टॉक्सिन्स का संपर्क भी इसके प्रमुख कारण हैं।
किडनी से जुड़ी बीमारियों के सामान्य लक्षणों में कमजोरी, अस्वस्थ महसूस होना, भूख कम लगना, मतली, उल्टी, पेशाब कम आना या बार-बार आना, पेशाब में खून या झाग आना, सांस फूलना, शरीर में सूजन, अत्यधिक नींद या सुस्ती शामिल हैं। हालांकि, ये लक्षण तब दिखाई देते हैं जब दोनों किडनी गंभीर रूप से प्रभावित हो चुकी होती हैं।
डॉ. ब्लेसी ने आगे बताया “इसलिए एक व्यावहारिक तरीका है नियमित हेल्थ चेकअप, खासकर उन लोगों के लिए जो हाई-रिस्क ग्रुप में आते हैं, जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, परिवार में इन बीमारियों का इतिहास, या पहले से किडनी रोग से ग्रसित लोग। दो सरल जांच — सीरम क्रिएटिनिन (खून की जांच जो शरीर में वेस्ट की मात्रा बताती है) और eGFR (जो बताता है कि किडनी खून को कितनी अच्छी तरह फिल्टर कर रही हैं) — के साथ-साथ एक यूरिन टेस्ट UACR (यूरिन एल्ब्यूमिन–क्रिएटिनिन रेशियो) किडनी की बीमारी का शुरुआती स्तर पर पता लगाने में मदद करते हैं। समय पर पहचान होने से इलाज जल्दी शुरू किया जा सकता है, जिससे बीमारी की प्रगति को धीमा किया जा सकता है और जटिलताओं से बचा जा सकता है।“
किडनी को स्वस्थ रखने के लिए कुछ आसान कदम बेहद प्रभावी साबित हो सकते हैं। नियमित व्यायाम और लाइफस्टाइल में सुधार करके वजन को नियंत्रित रखें। प्रोसेस्ड फूड, अचार और नमकीन का सेवन कम करें। बिना जरूरत पेनकिलर्स लेने से बचें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, लेकिन जरूरत से ज्यादा नहीं। बिना प्रमाणित हर्बल दवाइयों से दूरी बनाएं और धूम्रपान छोड़ दें। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीज अपने ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखें और नियमित रूप से डॉक्टर से परामर्श लेते रहें।
इन सभी उपायों के साथ संतुलित और हेल्दी डाइट अपनाने से आपकी किडनी लंबे समय तक स्वस्थ और सुरक्षित रह सकती हैं।