मनरेगा में ‘डिजिटल घोटाला’ का बड़ा खुलासा: जनप्रतिनिधि ही बन रहे मजदूर, जांच की मांग तेज
मिर्जापुर (पड़री)। विकासखंड पहाड़ी के ग्राम पंचायत पड़री में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन निर्वाचित जनप्रतिनिधियों पर योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है, वही अब मजदूर बनकर फर्जी तरीके से भुगतान ले रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बावजूद मनरेगा कार्यों में धांधली रुकने का नाम नहीं ले रही। आरोप है कि जनप्रतिनिधि खुद मजदूर के रूप में साइट पर फोटो खिंचवाकर भुगतान उठा रहे हैं, जो सीधे-सीधे नियमों का उल्लंघन है। जब डिजिटल सिस्टम में ही इतनी बड़ी गड़बड़ी हो रही है, तो पुराने कागजी अभिलेखों में हुए घोटालों का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं।
ग्राम पंचायत में इंटरलॉकिंग ईंट और आरसीसी निर्माण कार्यों में भी मानकों की अनदेखी के आरोप लगे हैं। साथ ही मजदूरी भुगतान में भी भारी अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार लिखित शिकायतें संबंधित अधिकारियों को दी गईं, लेकिन हर बार सिर्फ औपचारिकता निभाकर मामले को दबा दिया गया।
स्थानीय निवासी सुशील कुमार यादव ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मनरेगा में भारी पैमाने पर घोटाला किया जा रहा है। सिर्फ यही नहीं, ग्राम पंचायत के अन्य विकास कार्यों में भी भ्रष्टाचार चरम पर है। लेकिन विकासखंड पहाड़ी के अधिकारी केवल खानापूर्ति कर मामले को रफा-दफा कर देते हैं।”
ग्रामीणों में इस पूरे मामले को लेकर जबरदस्त आक्रोश है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी धन की लूट पर लगाम लग सके।
अब सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस ‘डिजिटल घोटाले’ पर सख्त कदम उठाएंगे या फिर जांच के नाम पर एक बार फिर फाइलों में ही मामला दब जाएगा?