ऑपरेशन एपिक फ्यूरी: क्या ईरान और अमेरिका के बीच महायुद्ध शुरू हो चुका है?
ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा स्थिति काफी तनावपूर्ण और गंभीर बनी हुई है। मार्च 2026 की ताज़ा जानकारी के अनुसार, दोनों देशों के बीच सीधा संघर्ष और कूटनीतिक रस्साकशी चरम पर है।
यहाँ इस पूरे घटनाक्रम का मुख्य विवरण दिया गया है:
1. सैन्य संघर्ष और 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury)
फरवरी 2026 के अंत में अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए थे, जिसे 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' का नाम दिया गया।
प्रमुख घटना: इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और कई शीर्ष सैन्य कमांडरों के मारे जाने की खबरें आईं।
ईरान की प्रतिक्रिया: जवाबी कार्रवाई में ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायल पर मिसाइल हमले किए। साथ ही, ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने की चेतावनी दी है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति संकट में आ गई है।
2. अमेरिका का '15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव' (15-Point Peace Plan)
राष्ट्रपति ट्रंप के प्रशासन ने पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को एक समझौता प्रस्ताव भेजा है। इसकी मुख्य शर्तें निम्नलिखित हैं:
परमाणु कार्यक्रम का अंत: ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह बंद करना होगा।
मिसाइल कार्यक्रम पर रोक: बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास को सीमित करना।
क्षेत्रीय हस्तक्षेप: मध्य पूर्व में प्रॉक्सी समूहों (जैसे हिज्बुल्लाह) को समर्थन देना बंद करना।
बदले में क्या मिलेगा? अमेरिका ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने और तेल व्यापार में छूट देने के लिए तैयार है।
3. ईरान का रुख: कड़ा प्रतिरोध
ईरान ने फिलहाल अमेरिका के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। ईरान की शर्तें हैं:
ईरान के नेताओं की हत्या और हमलों पर रोक।
युद्ध से हुए नुकसान के लिए हर्जाना (Reparations)।
यह गारंटी कि भविष्य में ईरान की संप्रभुता पर कोई हमला नहीं होगा।
4. वर्तमान स्थिति (मार्च 27, 2026)
डेडलाइन का विस्तार: राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा केंद्रों (Energy Sites) पर बमबारी की अपनी धमकी को फिलहाल 6 अप्रैल 2026 तक टाल दिया है।
मध्यस्थता: पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे देश दोनों पक्षों के बीच अनौपचारिक बातचीत (Back-channel talks) कराने की कोशिश कर रहे हैं।
आर्थिक प्रभाव: इस तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में तेल की कीमतें बढ़ गई हैं और शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखी जा रही है।
निष्कर्ष: स्थिति अभी भी "युद्ध या शांति" के बीच लटकी हुई है। जहाँ एक तरफ सैन्य हमले जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ पर्दे के पीछे कूटनीतिक समाधान खोजने की कोशिशें भी हो रही हैं।