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देहरादून–हरिद्वार–रुड़की में सम्पन्न हुआ वार्षिक “मेहेर मेला”, देशभर से उमड़े श्रद्धालु

देहरादून/हरिद्वार/रुड़की। प्रेम, सेवा और मानव एकता के आध्यात्मिक संदेश के साथ 22 से 25 मार्च 2026 तक देहरादून, हरिद्वार और रुड़की में वार्षिक “मेहेर मेला” श्रद्धा एवं भक्ति भाव से सम्पन्न हुआ। चार दिवसीय इस आयोजन में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए मेहेर प्रेमियों ने भाग लेकर सत्संग, भजन, प्रार्थना एवं आध्यात्मिक चिंतन का लाभ प्राप्त किया।

कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक एवं व्यावसायिक क्षेत्रों से जुड़े श्रद्धालुओं ने सहभागिता करते हुए प्रेम, सेवा और भाईचारे का संदेश आत्मसात किया। आयोजन के दौरान आध्यात्मिक एकाग्रता, अनुशासन और समर्पण का विशेष वातावरण देखने को मिला।

23 मार्च 1953 का ऐतिहासिक महत्व:
अवतार मेहेर बाबा के जीवन से जुड़ा 23 मार्च 1953 का दिन आध्यात्मिक साधकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। उपलब्ध ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार, बाबा 18 फरवरी 1953 को अपने आध्यात्मिक कार्य हेतु कुछ समय के लिए देहरादून आए थे। भक्तों के आग्रह पर 23 मार्च 1953 (रामनवमी) को उन्होंने देहरादून में प्रथम सार्वजनिक दर्शन (Public Darshan) दिया, जो आध्यात्मिक इतिहास की महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन कर आध्यात्मिक प्रेरणा प्राप्त की।

बताया जाता है कि बाबा ने अपने संदेश में कहा कि "ईश्वर ही शाश्वत सत्य है तथा सच्चा साधक वही है जो सांसारिक कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए भी ईश्वर का स्मरण बनाए रखे।"

देहरादून की विशेष आध्यात्मिक पहचान:
मेहेर प्रेमियों के अनुसार देहरादून को विशेष आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है। ऐतिहासिक उल्लेखों के अनुसार अवतार मेहेर बाबा ने अपने प्रेमियों को प्रेम मार्ग एवं सरल जीवन व्यतीत करने के लिए प्रेरित किया।

इसी कालखंड में अवतार मेहेर बाबा द्वारा “परवरदिगार प्रार्थना” (13 अगस्त 1953) तथा “ऊँचे से ऊँचा” (7 सितम्बर 1953) जैसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक संदेश दिए गए, जो आज भी अनुयायियों के लिए मार्गदर्शक माने जाते हैं।

इतिहास में यह भी उल्लेख मिलता है कि बाबा ने अपने “न्यू लाइफ़” काल से संबंधित महत्वपूर्ण अवधि वर्ष 1950 में देहरादून क्षेत्र में व्यतीत की, जिससे इस स्थान का आध्यात्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया।

विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालु:
चार दिवसीय मेहेर मेले में देश के विभिन्न भागों से आए श्रद्धालुओं ने सामूहिक प्रार्थना, भजन एवं आध्यात्मिक विचार गोष्ठियों में भाग लिया। आयोजन के दौरान मानव एकता, प्रेम एवं सेवा को जीवन का आधार मानने पर बल दिया गया।

श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसे आयोजन मन को शांति प्रदान करते हैं तथा व्यक्ति को सकारात्मक सोच एवं आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में प्रेरित करते हैं।

आध्यात्मिक एकता का संदेश:
आयोजन में यह संदेश प्रमुख रूप से उभरकर सामने आया कि प्रेम और निःस्वार्थ सेवा के माध्यम से ही ईश्वर के निकट पहुंचा जा सकता है। मेहेर प्रेमियों के अनुसार ऐसे आध्यात्मिक आयोजन समाज में सद्भाव, नैतिक मूल्यों एवं आंतरिक शांति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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