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वर्तमान स्थिति को युद्ध संकट से सारी दुनिया प्रभावित हो रही है। इसलिए ऐसी परिस्थितियों को ध्यान देना हम सब का उत्तरदायित्व है। पत्रकार संचार परिषद

अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को न्याय और सशक्तिकरण दिलाने पर केंद्रित जब तक भारत का गांव (ग्राम पंचायत) आत्मनिर्भर और 'शुद्ध' (न्यायिक और नैतिक) रूप से नहीं होगा, तब तक भारत का विकास अधूरा है।
1- आत्मनिर्भर ग्राम पंचायत:-
'लोकतंत्र की नींव' भाव - ग्राम पंचायत केवल प्रशासनिक इकाई नहीं है, लोकतंत्र का प्राथमिक पाठशाला है।
समायोजन - ग्राम स्वराज और आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल आर्थिक आत्म निर्भरता नहीं बल्कि न्यायिक और निर्णय लेने की आत्मनिर्भरता भी है।
तर्क- ग्राम पंचायत का विवाद गांव में सुलझे (ग्राम न्यायालय मध्यस्थता) यह आत्मनिर्भर ग्राम पंचायत का पहला लक्षण है।
भारतीय न्याय व्यवस्था और पत्रकारिता 'सेतु और प्रहरी'
ग्रामीण शुद्धिकरण: 'नैतिक और न्यायिक पवित्रता'
भाव: शुद्धिकरण का अर्थ यहां गांव में गुटबाजी भ्रष्टाचार लंबित विवादों के बोझ से मुक्त करना है।
समायोजन: जब ग्राम पंचायत में नैतिक रूप से मजबूत होगी तभी वह न्याय कर पाएंगी।
तर्क : गांव में 'सामाजिक न्याय' और विधिक साक्षरता लाना ही ग्रामीण शुद्धिकरण है।
भारतीय न्याय व्यवस्था और पत्रकारिता 'सेतु और प्रहरी'
न्याय व्यवस्था उसे ग्राम पंचायत के फैसलों को जहां वे न्याय संगत हो मान्यता देनी चाहिए।
पत्रकारिता:-पत्रकारिता को गांव और उच्च न्यायालय व्यवस्था के बीच एक 'पारदर्शी सेतु' बनाना होगा।
पत्रकार का काम केवल समस्या बताना नहीं बल्कि यह भी देखना है कि क्या ग्राम पंचायत में 'न्याय' हो रहा है? क्या आत्मनिर्भरता के नाम पर किसी का शोषण तो नहीं हो रहा है।
पत्रकारिता यहां लोकतांत्रिक प्रहरी है।
जब तक पत्रकारिता ग्रामीण अंचल की आवाज बनकर ग्राम पंचायत को जवाब दे नहीं बन पाएगी तब तक भारतीय न्याय व्यवस्था का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंचेगा ग्रामीण शुद्धिकरण का अर्थ गांव में न्याय और गांव में न्याय और गांव का न्याय ही आत्मनिर्भर ग्राम पंचायत का असली पहचान है।
कृष्ण कुमार पाठक
लेखक/पत्रकार
पत्रकार संचार परिषद
उत्तर प्रदेश, भारत

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