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बिलारी में दादा करीम शाह मियां की मजार पर भव्य चादर पेश, उमड़ा जनसैलाब — भाईचारे की अद्भुत मिसाल

बिलारी (मुरादाबाद), 22 मार्च 2026
कस्बा बिलारी में ईद-उल-फितर के दूसरे दिन दादा करीम शाह मियां की मजार पर हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और भव्यता के साथ चादर पेश की गई। इस अवसर पर क्षेत्र में अकीदत, मोहब्बत और गंगा-जमुनी तहजीब की अनोखी मिसाल देखने को मिली। बिलारी नगर के वरिष्ठ समाजसेवी एवं पूर्व सभासद मुख्तार आलम बंजारा के नेतृत्व में उनके निवास स्थान से निकली चादर यात्रा ने पूरे कस्बे का माहौल आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। यह चादर बीच की बगिया स्थित बंजारों वाले कब्रिस्तान में नूरूल नबी मस्जिद के सामने स्थित मजार शरीफ पर पूरे सम्मान और अकीदत के साथ पहुंचा, जहां चादर पेश की गई। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में अकीदतमंदों की उपस्थिति ने इसे एक भव्य जनसमूह का रूप दे दिया। “नारे-तकबीर” की गूंज और सूफियाना कलामों ने पूरे वातावरण को रूहानी बना दिया। हर और उत्साह, उल्लास और आपसी भाईचारे की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।

इस आयोजन को सफल बनाने में बिलारी नगर के वरिष्ठ समाजसेवी एवं पूर्व सभासद मुख्तार आलम बंजारा की सराहनीय भूमिका रही। क्षेत्र में उनकी सामाजिक सक्रियता, जनसेवा और लोगों के प्रति समर्पण की भावना की उपस्थित लोगों ने खुले दिल से प्रशंसा की। उनके नेतृत्व में यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि समाज में एकता और सौहार्द का सशक्त संदेश भी देता नजर आया।

वरिष्ठ समाजसेवी एवं पूर्व सभासद मुख्तार आलम बंजारा ने बताया कि दादा करीम शाह मियां एक महान सूफी संत, वली थे, जिनकी शिक्षाएं आज भी समाज को प्रेम, शांति और इंसानियत का रास्ता दिखाती हैं। उन्होंने कहा कि यह परंपरा हमारे पूर्वजों की देन है, जिसे आज भी पूरे सम्मान और उल्लास के साथ निभाया जा रहा है।

अंत में मजार शरीफ पर देश की तरक्की, अमन-चैन, भाईचारे और हिन्दुस्तान की एकता एवं अखंडता के लिए विशेष दुआ की गई। इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे और सभी ने इस पावन आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

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