यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (इंडिपेंडेंट) [ULFA(आई)] एक बार फिर अपने संगठन को पुनर्गठित करने के प्रयास में जुटा हुआ है।
सूत्रों के अनुसार संगठन ने सीमित संसाधनों के बावजूद कुछ नए हथियार भी शामिल किए हैं। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि वर्तमान स्थिति में यह संगठन आगामी असम विधानसभा चुनावों को गंभीर रूप से प्रभावित करने की क्षमता नहीं रखता। सूत्र बताते हैं कि म्यांमार में स्थित इसके कैंप फिलहाल व्यवस्थित नहीं हैं, जबकि असम- अरुणाचल प्रदेश सीमा पर लगभग 8 से 10 उग्रवादी सक्रिय हैं, जो समय-समय पर असम में प्रवेश कर वसूली (एक्सटॉर्शन) की कोशिश करते हैं। हाल ही में जगुन स्थित पुलिस कैंप पर हुआ हमला भी संगठन की मौजूदगी दर्शाने का प्रयास माना जा रहा है। खुफिया जानकारी के अनुसार, व्यवसायिक वर्ग द्वारा वसूली की मांगों को नजरअंदाज किए जाने के कारण संगठन आर्थिक संकट से जूझ रहा है। फिलहाल बड़े स्तर पर खतरा नहीं, लेकिन सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।