नाशिक बागलाण अंतापुर घानसोळा खडि मैं आदिवासी कुलदेवी याहामोगी मां मंदिर बन रहा है,आदिवासी संस्कृति रूढी गत प्रथा संस्कृतिक र पंच प्रथा से पुजता हैं,
🛕 याहा मोगी माँ (कुलदेवी)
याहा मोगी माँ आदिवासी समुदाय (खासकर भिल / गोंड/कोरकू आदि) की कुलदेवी (परिवार की देवी) के रूप में पूजी जाती हैं।
इन्हें शक्ति और संरक्षण की देवी माना जाता है, जो परिवार और गाँव की रक्षा करती हैं।
इस देवी की पूजा आमतौर पर प्रकृति, जंगल और पारंपरिक रीति-रिवाजों से जुड़ी होती है।
📍 आदिवासी प्रांत बागलाण अंतापुर खाड़ी ट्रस्ट ,
यह स्थान एक धार्मिक ट्रस्ट/ हालीमे मंदिर स्थल बना है , जहाँ याहा मोगी माँ की पूजा होती है।
यहाँ पर:
वार्षिक जत्रा महाशिवरात्रि (मेला)लगना है
आदिवासी परंपराओं के अनुसार भजन, नृत्य और पूजा आयोजित होती है ,
स्थानीय लोगों के लिए यह आस्था और सांस्कृतिक पहचान का केंद्र है।
🙏 विशेषताएँ
पूजा में अक्सर पारंपरिक ढोल-नगाड़े, नृत्य और लोकगीत शामिल होते हैं
प्रकृति के बीच स्थित होने के कारण इसका वातावरण बहुत शांत और आध्यात्मिक होता है
यहाँ लोग मनोकामना पूर्ति और आशीर्वाद के लिए आते हैं