माननीय मुख्यमंत्री जी जब अधिवक्ता ही खुद पीड़ित हो तो दूसरों को न्याय कैसे दिलाए-----
माननीय मुख्यमंत्री जी जब अधिवक्ता ही खुद पीड़ित हो तो दूसरों को न्याय कैसे दिलाए-----
जनपद अंबेडकर नगर के अधिवक्ता जिसका प्रतिदिन एक ही काम था घर से सुबह कचेहरी टीन शेड के नीचे बैठ कर वह ठंडी गर्मी बरसात में दौड़ दौड़ कर वादकारियों को न्याय दिलाने का काम यह कर रहे थे किंतु कुछ शरारती तत्व जो अपने आप को माफिया बनाने की फिराक में है अचानक हमलावर हो गए और अधिवक्ता श्री प्रभात मिश्रा जी को उनकी गाड़ी के शीशे को तोड़कर उनको जबरन खींच कर गाड़ी से बाहर निकाल कर अपनी गाड़ी में ले जाने का प्रयास करने लगे प्रयास असफल होने पर उन लोगों ने अवैध असलहे से फायरिंग करते हुए लोहे की राड डंडा व हाकी से बुरी तरीके से अधिवक्ता प्रभात मिश्रा को मारने पीटने लगे जिससे उनके पूरे शरीर के साथ साथ सिर पर लोहे की रॉड से हमला कर दिया और तरह-तरह की गालियां देते हुए धमकी दिए और यह घटना दिनदहाड़े की है ऐसे में क्या उत्तर प्रदेश में अधिवक्ता होना गुनाह है या वादकारियों को न्याय दिलाना गुनाह है? सरल स्वभाव के अधिवक्ता श्री प्रभात कुमार मिश्रा जी अकबरपुर से अपने घर जा रहे थे समय करीब दोपहर 3:00 बजे अचानक घेराबंदी कर अपराधियों द्वारा उनके ऊपर जानलेवा हमला किया गया और उनके सोने की चेन मोबाइल फोन व कार की चाभी को भी छीन लिया इसके संबंध में भीटी थानाध्यक्ष द्वारा जबरन छिनती की बात प्रार्थना पत्र से कटवा कर मुकदमा दर्ज किया इसके पूर्व सभी अभियुक्त 10 दिन से अधिवक्ता का पीछा कर रहे थे इसके संबंध में अधिवक्ता महोदय द्वारा थाना थाना भीटी में इसकी सूचना कई बार दिया था किंतु थाना के सुस्त रवैया के कारण यह घटना करती हुई। जनपद अंबेडकर नगर में माफियाओं के हौसले बुलंद हो गए है l