देश के नौ राज्य खुरपका-मुंहपका रोग (एफएमडी) से मुक्त हो चुके हैं.
देश के नौ राज्य खुरपका-मुंहपका रोग (एफएमडी) से मुक्त हो चुके हैं और उन्हें इसका प्रमाणन दिलाकर देश का डेयरी निर्यात बढ़ाने की सरकार की योजना है।
केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने बुधवार को राज्यसभा में एक पूरक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश दूध के उत्पादन में पहले स्थान पर है। इसके बावजूद डेयरी उत्पादों के निर्यात में हम पीछे हैं क्योंकि कई देशों में डेयरी निर्यात के लिए एफएमडी मुक्त प्रमाणन जरूरी है।
श्री सिंह ने कहा कि साल 2014-15 में हमारा दुग्ध उत्पादन 14.63 करोड़ टन से बढ़कर 24.8 करोड़ टन हो गया है। हमारी उत्पादकता भी प्रति पशु प्रति वर्ष 1,648 किग्रा से 2,251 किग्रा हो गयी है।
उन्होंने कहा, "खुर एवं मुख रोग (एफएमडी) के कारण अमेरिका, जापान और यूरोप जैसे बाजारों में निर्यात नहीं कर सकते हैं। ये देश एफएमडी मुक्त प्रमाणन के बिना अपने यहां किसी भी तरह के डेयरी उत्पाद के आयात अनुमति नहीं देते हैं।
मंत्री ने सदन को बताया कि देश में नौ राज्य एफएमडी मुक्त हो गये हैं। इन राज्यों को विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूओएएच) से प्रमाणन दिलाने की दिशा में काम चल रहा है। इन राज्यों को एफएमडी मुक्त घोषित कर डेयरी निर्यात को बढ़ावा दिया जायेगा।
उन्होंने बताया कि एफएमडी की रोकथाम के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है और अगले तीन साल में पूरे देश को एफएमडी मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके टीके का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती है और टीका लगाने वालों को पारिश्रमिक भी देती है। इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए उपाय किये गये हैं। इसके परिणाम स्वरूप साल 2019 में जहां एफएमडी रोग फैलने की 132 घटनाएं सामने आयी थीं, साल 2025 में यह मात्र 40 रह गयी।
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