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भारतीय किसान संघ की बैठक में किसानों के हक की हुंकार: मंडियों में शोषण, बीमा भुगतान में देरी और सरकारी अव्यवस्था के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी

इटावा, 25 मार्च।
भारतीय किसान संघ की कोटा संभाग स्तरीय महत्वपूर्ण बैठक काला तलाव स्थित कार्यालय बलदाऊ भवन पर संपन्न हुई। जिसमें हाड़ौती संभाग के किसानों की ज्वलंत समस्याओं पर गहन चर्चा की गई। बैठक को संबोधित करते हुए प्रान्त अध्यक्ष शंकरलाल नागर और प्रान्त महामंत्री अंबालाल शर्मा ने कहा कि अन्नदाता आज एक ओर प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहा है, तो दूसरी ओर मंडियों में व्याप्त प्रशासनिक भ्रष्टाचार और सरकारी खरीद की जटिल प्रक्रियाओं के कारण उसका आर्थिक शोषण हो रहा है। संगठन ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने तुरंत सख्त कदम नहीं उठाए, तो किसान सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।

जिला सह प्रचार प्रमुख उमाशंकर नागर ने बताया कि​बैठक में कोटा की भामाशाह मंडी सहित संभाग की अन्य मंडियों में हो रही अवैध कटौतियों पर कड़ा रोष व्यक्त किया गया। संघठन मंत्री परमानन्द ने बताया कि व्यापारियों और बिचौलियों द्वारा अनाज की तुलवाई में प्रति कट्टा 200 से 300 ग्राम की अतिरिक्त कटौती की जा रही है, जो किसानों की मेहनत पर सीधा डाका है। इसके अलावा, बूंदी और कोटा की मंडियों में हम्माली के नाम पर महिला श्रमिकों के लिए ₹2 से ₹3 की अवैध वसूली फिर से शुरू कर दी गई है, जबकि पूर्व में इसे बंद करने पर सहमति बनी थी। मंडी प्रबंधन की विफलता के कारण लगने वाले भारी जाम से निजात पाने के लिए संघ ने मांग की है कि किसानों की फसल की बोली उनके वाहनों पर ही लगाई जाए और धर्मकांटे पर सीधी तुलवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही, चंद्रेशल में प्रस्तावित फल-सब्जी मंडी का निर्माण कार्य तत्काल शुरू करने की मांग दोहराई गई।

गिरीराज चौधरी ने खरीफ 2025 में अतिवृष्टि के कारण बर्बाद हुई फसलों का मुद्दा उठाते हुए संगठन ने कहा कि महीनों बीत जाने के बाद भी 'प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना' और सरकारी 'आदान अनुदान' की राशि किसानों के खातों में नहीं पहुंची है। मुआवजे में इस विलंब के कारण किसानों के पास अगली फसल की बुवाई और निवेश के लिए पूंजी का अभाव हो गया है। संघ ने सरकार और बीमा कंपनियों को आपसी तालमेल बिठाकर लंबित क्लेम राशि तुरंत जारी करने के निर्देश देने की मांग की है।

बैठक का संचालन संभाग मंत्री भूपेंद्र शर्मा ने किया। इस अवसर पर प्रदेश जैविक प्रमुख प्रह्लाद नागर, शिवराज पुरी, संगठन मंत्री परमानन्द, संभाग अध्यक्ष गिरीराज चौधरी, प्रान्त प्रचार प्रमुख आशीष मेहता, महिला प्रमुख रजनी धाकड़ सहित कोटा, बारां, झालावाड़ और बूंदी के जिलाध्यक्ष क्रमशः जगदीश कलमंडा, अमृत छजावा, राधेश्याम गुर्जर और संतोष दुबे प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

*सरकारी खरीद में तकनीकी बाधाएं और स्लॉट सिस्टम का कुप्रबंधन*
प्रान्त प्रचार प्रमुख आशीष मेहता ने कहा कि ​गेहूं की सरकारी खरीद के लिए लागू की गई नई 'ऑनलाइन स्लॉट' व्यवस्था किसानों के लिए जी का जंजाल बन गई है। सर्वर की खराबी और तकनीकी अज्ञानता के कारण किसानों को जुलाई तक की तारीखें मिल रही हैं, जबकि खरीद केंद्र जून में ही बंद हो जाएंगे। उन्होने बताया कि पिछले लक्ष्य को घटाकर इस वर्ष मात्र 1 हजार क्विंटल कर दिया गया है और शनिवार का अवकाश घोषित करने से प्रक्रिया और धीमी हो गई है। संगठन की मांग है कि स्लॉट व्यवस्था को शिथिल कर पुराने पंजीकरण के आधार पर खरीद की जाए और आवंटित तिथि के बाद भी 10 दिनों की छूट दी जाए। विशेष रूप से बूंदी के उन 33 गांवों के लिए 'ऑफलाइन' खरीद की व्यवस्था की जाए जिनका रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज नहीं है।

​राजस्व रिकॉर्ड की त्रुटियां और गुणवत्ता मानकों में रियायत की मांग
​कोटा जिले में ऑनलाइन गिरदावरी की तकनीकी खामियों के कारण कई किसानों की फसल पोर्टल पर "शून्य" दिखाई दे रही है, जिससे वे सरकारी लाभ से वंचित हैं। संघ ने इस पोर्टल को पुनः खोलकर रिकॉर्ड सुधारने की मांग की है। इसके साथ ही, गेहूं की प्रति हेक्टेयर खरीद सीमा को 40 क्विंटल से बढ़ाकर 50 क्विंटल करने और सरसों-चना की खरीद सीमा 40 क्विंटल करने का आग्रह किया गया है। हाड़ौती में 'काले नुक्के' वाले गेहूं को गुणवत्ता के नाम पर रिजेक्ट करने को तर्कहीन बताते हुए इसमें रियायत देने की मांग की गई है। साथ ही, खरीद केंद्रों पर 150 ग्राम के प्लास्टिक कट्टे के बदले 700 ग्राम की अतिरिक्त तौल को बंद कर इसे व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया गया है।

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