एनआईटी राउरकेला ने प्रतिबंधित क्षेत्रों में घुसपैठियों का पता लगाने के लिए उन्नत प्रणाली का पेटेंट कराया
● यह पूरी तरह से स्वचालित प्रणाली व्यक्ति की चाल (गेट) के आधार पर उन्हें पहचानकर बड़ी बिल्डिंग/कॉम्पलेक्स आदि में अनधिकृत प्रवेश का पता लगाती है
● लगभग 1.90 लाख रुपये की लागत से विकसित यह प्रणाली कम रोशनी और रात के समय संचालन के लिए थर्मल इमेजिंग तकनीक का उपयोग करती है
● इस प्रणाली का उपयोग शैक्षणिक संस्थानों, कॉर्पोरेट परिसरों, रक्षा प्रतिष्ठानों और उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्रों में किया जा सकता है, जहां विश्वसनीय पहचान अत्यंत महत्वपूर्ण है
राउरकेला, 25 मार्च 2026: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान राउरकेला (एनआईटी राउरकेला) के शोधकर्ताओं ने “इंट्रा-बिल्डिंग सुरक्षा के लिए थर्मल इमेजिंग और गेट रिकग्निशन का उपयोग कर अनधिकृत व्यक्ति का पता लगाने” शीर्षक वाली एक स्मार्ट निगरानी तकनीक के लिए पेटेंट प्राप्त किया है (पेटेंट संख्या: 580748, आवेदन संख्या: 202331058606)।
इस प्रणाली का विकास एनआईटी राउरकेला के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर समित आड़ि तथा रिसर्च स्कॉलर मोहम्मद इमान जुनैद, नारायण प्रसाद शर्मा और इरशाद अली द्वारा किया गया है। यह तकनीक बड़े भवन परिसरों में अनधिकृत प्रवेश की निगरानी की चुनौती से निपटने के लिए एक अगली पीढ़ी का समाधान प्रस्तुत करती है।
पारंपरिक सीसीटीवी कैमरा आधारित निगरानी प्रणालियों में व्यापक मैनुअल निगरानी और विश्लेषण की आवश्यकता होती है, जिससे वे अप्रभावी हो जाती हैं और मानव त्रुटियों की संभावना बढ़ जाती है। बड़े परिसरों में विभिन्न कैमरों के माध्यम से व्यक्तियों का पता लगाना विशेष रूप से बदलती रोशनी और अवरोधों की स्थिति में कठिन होता है।
इन सीमाओं को दूर करने के लिए, एनआईटी राउरकेला की शोध टीम ने एक पूरी तरह से स्वचालित और गैर-हस्तक्षेपकारी प्रणाली विकसित की है, जो थर्मल इमेजिंग तकनीक का उपयोग करके व्यक्तियों का पता लगा सकती है, उनकी पहचान कर सकती है और उन्हें ट्रैक कर सकती है। यह नवाचार भारत के विज्ञान एवं अभियांत्रिकी अनुसंधान बोर्ड (SERB) के सहयोग से अनुदान संख्या CRG/2019/001414 के तहत विकसित किया गया है और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी के लिए डिजाइन किया गया है। थर्मल इमेजिंग तकनीक कम इंफ्रारेड शोर के कारण इंसानों को उनके बैकग्राउंड या आस-पास के वातावरण से अलग करने में सहायता करती है तथा कम रोशनी की स्थिति में भी सटीक पहचान करने में सक्षम बनाती है।
इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए, शोध टीम ने मानव चाल (गेट) को एक बायोमेट्रिक पहचान के रूप में उपयोग किया है, जो व्यक्तियों की विशिष्ट चलने की शैली के आधार पर उनकी पहचान करता है, जिससे मैनुअल निगरानी की आवश्यकता कम हो जाती है। जब कोई व्यक्ति प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करता है, तो यह प्रणाली उसकी चाल की तुलना अधिकृत व्यक्तियों के डेटा से करती है। यदि मेल नहीं मिलता है, तो प्रणाली उसे संदिग्ध के रूप में चिह्नित करती है और सुरक्षा को सतर्क करती है। शोध दल ने तीन थर्मल कैमरों से युक्त एक कार्यशील प्रोटोटाइप विकसित किया है, जो यूएसबी इंटरफेस के माध्यम से एक केंद्रीय सर्वर से जुड़े हैं। यह प्रणाली प्रवेशद्वार पर अनधिकृत व्यक्तियों का पता लगाती है, उनके मूवमेंट को कई चेकपॉइंट्स के माध्यम से ट्रैक करती है, अज्ञात व्यक्तियों के लिए एक अस्थायी डेटाबेस बनाए रखती है, और गति की दिशा के आधार पर प्रवेश और निकास पैटर्न निर्धारित करती है। यदि कोई व्यक्ति प्रतिबंधित क्षेत्र से बाहर निकल जाता है, तो उसका अस्थायी रिकॉर्ड हटा दिया जाता है, जबकि ऐतिहासिक डेटा भविष्य के संदर्भ और फोरेंसिक उपयोग के लिए सुरक्षित रखा जाता है।
इस विकसित तकनीक की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए, प्रो. समित आड़ि ने कहा, “लगभग 1.90 लाख रुपये की लागत से विकसित यह प्रणाली कम रोशनी और रात के समय संचालन के लिए थर्मल इमेजिंग का उपयोग करती है, साथ ही गेट-आधारित पहचान के माध्यम से गैर-हस्तक्षेपकारी बायोमेट्रिक पहचान प्रदान करती है। बहु-कैमरा स्वचालित ट्रैकिंग विभिन्न स्थानों पर निर्बाध निगरानी सुनिश्चित करती है, जिसे केंद्रीकृत डेटा प्रोसेसिंग द्वारा लॉगिंग और डेटाबेस प्रबंधन के लिए समर्थन मिलता है।”
यह प्रणाली शैक्षणिक संस्थानों, कॉर्पोरेट परिसरों, रक्षा प्रतिष्ठानों और उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्रों में व्यापक रूप से उपयोगी है, जहां विश्वसनीय पहचान अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इसके अलावा, यह औद्योगिक और अनुसंधान एवं विकास (R&D) सुविधाओं में निगरानी और सुरक्षा बढ़ाने के लिए भी उपयुक्त है। कम दृश्यता और रात के समय भी प्रभावी ढंग से कार्य करने की इसकी क्षमता इसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में निगरानी के लिए आदर्श बनाती है।
प्रणाली के संभावित उपयोग के बारे में बताते हुए, प्रो. आड़ि ने कहा, “यह प्रणाली मैनुअल निगरानी पर निर्भरता को कम करने में सहायक है, जिससे संचालन दक्षता में सुधार होता है। यह तेज़ और अधिक सटीक खतरे की पहचान को सक्षम बनाती है, जिससे संभावित जोखिमों पर समय रहते प्रतिक्रिया दी जा सकती है। कम दृश्यता और जटिल वातावरण जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में विश्वसनीय प्रदर्शन के लिए डिज़ाइन की गई यह प्रणाली संग्रहीत गेट डेटा के विश्लेषण और पहचान के माध्यम से फोरेंसिक जांच को भी सुदृढ़ करती है।”
अगले चरण में, शोध टीम इस तकनीक को वास्तविक परिस्थितियों में लागू करने के लिए संभावित औद्योगिक सहयोग की तलाश कर रही है, विशेष रूप से सुरक्षा-संवेदनशील क्षेत्रों में।
वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के लिए सतत समाधान विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए, एनआईटी राउरकेला समाज की महत्वपूर्ण आवश्यकताओं को संबोधित करने वाले अनुसंधान और नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही अकादमिक जगत, उद्योग और सरकार के बीच सहयोग को बढ़ावा देकर सार्थक और व्यापक प्रभाव सुनिश्चित करता है।