*संस्कार भारती का 15वां नववर्ष महोत्सव हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न
स्थानीय व आमंत्रित कलाकारों ने बिखेरी सांस्कृतिक रंगत, दर्शक हुए मंत्रमुग्ध
शाहगंज (जौनपुर)। नगर के श्री लक्ष्मी नारायण वाटिका (श्रीहनुमानगढ़ी) में संस्कार भारती’ द्वारा आयोजित 15वां नववर्ष महोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास एवं भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के पावन अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में कला, साहित्य और भारतीय संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने भारतीय नववर्ष के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे हमारी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बताया।
महोत्सव में बनारस घराने के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथक कलाकार रविशंकर मिश्र एवं माता प्रसाद मिश्र ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके साथ ही सीमा मौरवाल एवं अन्य कलाकारों ने भी आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। इसके अलावा मथुरा एवं स्थानीय क्षेत्र के कलाकारों ने लोकनृत्य, शास्त्रीय नृत्य एवं समूह नृत्य नाटक आदि प्रस्तुत कर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में संस्कार भारती शाहगंज की पूरी कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जिसमें अध्यक्ष रचित चौरसिया, उपाध्यक्ष श्रीप्रकाश अग्रहरि ‘सिन्पू’, मुकेश जायसवाल, कालीचरण जायसवाल, सुनील अग्रहरि ‘टप्पू’, नीतू मिश्रा, महामंत्री वीरेंद्र यादव ‘बीरू’, मंत्री शौर्य अग्रहरि, आनंद गुप्ता, सतीश यादव ‘बेदलाल’, संजिव जायसवाल, कुसुम जायसवाल, कोषाध्यक्ष प्रवीण बरनवाल ‘बब्लू’, प्रचार-प्रसार प्रमुख दीपक सिंह (पत्रकार) एवं शुभम केसरवानी प्रमुख रूप से शामिल रहे।
विधा संयोजकों में नृत्य कला के लिए भुवनेश्वर मोदनवाल, लोक कला के लिए अनुपमा अग्रहरि, साहित्य कला के लिए पवन तिवारी तथा कला धरोहर के लिए सुशील सेठ ‘बागी’ ने विशेष योगदान दिया।
कार्यक्रम में कार्यकारिणी सदस्य अरविंद अग्रहरि, सुनील अग्रहरि ‘टप्पू’, नीलम अग्रहरि, संगीता अग्रहरि, रामअवतार अग्रहरि सहित अन्य सदस्यों की सक्रिय सहभागिता रही।
महोत्सव में बड़ी संख्या में नगर एवं आसपास के क्षेत्रों के लोग उपस्थित रहे और देर रात तक कार्यक्रम का आनंद लेते रहे। अंत में आयोजकों द्वारा प्रभु श्रीराम की मूर्ति को सबसे पहले कागज़ पर उकेरने वाले काशी शिल्पकार सुनील कुमार विश्वकर्मा के साथ सभी कलाकारों एवं अतिथियों को सम्मानित किया गया।
संस्कार भारती के पदाधिकारियों ने कहा कि ऐसे आयोजन भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं।