#इसे कहते है जैसी बहे बयार पीठ तब तैसी दीजै l
#सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले (24 मार्च 2026) में स्पष्ट किया है कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म छोड़कर ईसाई या इस्लाम (अन्य धर्म) अपनाने वाले व्यक्ति का अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा तुरंत समाप्त हो जाएगा आदेश या अन्य आदेश के बाद।
#संपूर्ण जाति का हितेशी होने का खोखला दावा करने वाले नेताओं के बयान या सोशल मीडिया पर दिये बयान या किये पोस्ट के संदर्भ में है l
#इसे कहते है जैसी बहे बयार पीठ तब तैसी दीजै
#यह मुहावरा या कथन 'संपूर्ण जाति का झूठा हितेशी बनना' आमतौर पर किसी ऐसे व्यक्ति या नेता के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो सामने से तो किसी एक विशेष जाति या समाज के प्रति प्रेम, सहानुभूति और हितैषी होने का दिखावा करता है, लेकिन वास्तव में वह उनके हितों के प्रति गंभीर नहीं होता और न ही उनके लिए धरातल पर कुछ कार्य करता है।
#यदि आप किसी मामले में हितैषी (well-wisher) हैं तो खुद कोर्ट (Court) जाते या खुद नहीं जा सकते तो (पीड़ित संबंधित ) को कानूनी सहायता लेने या वकील के माध्यम से कोर्ट में अपना पक्ष रखने के मदद में करते?
#इस संदर्भ में मुख्य बातें:
#दिखावा (False Concern): ऐसे लोग केवल वोट बैंक या अपनी राजनीतिक/सामाजिक छवि बनाने के लिए जाति का इस्तेमाल करते हैं।
#अवसरवादिता (Opportunism): जब मौका मिलता है, तब ये लोग अपनी जाति के नाम पर भावनाएं भड़काते हैं, लेकिन वास्तव में खुद के फायदे के लिए काम करते हैं।
#झूठे वादे: संपूर्ण जाति का हितेशी होने का दावा करना अक्सर खोखला होता है और वास्तविक समस्या के समाधान के बजाय केवल प्रचार-प्रसार पर केंद्रित होता है।
#भावनात्मक शोषण: यह एक तरह का भावनात्मक शोषण है, जहाँ एक समुदाय को यह विश्वास दिलाया जाता है कि सामने वाला उनका अपना है, जबकि असल में वह उनके मुद्दों से अनजान या उदासीन हो सकता है।
#यह एक आलोचनात्मक टिप्पणी है किसी समूह का हितेशी होने का ढोंग करना समाज में विश्वास की कमी को जन्म देता है l
#यह मेरी निजी राय है अगर मेरे इस विचार से किसी को ठेस पहुंची हो या गलतफहमी हुई हो तो मैं माफी मांगता हूंl
Sushant Kumar Khan
Executive Member of All India Media Association and Social Media Activist