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धनबाद: दरिदा जमीन विवाद में नया मोड़; रैयतों ने बाहरी जनप्रतिनिधि पर लगाया भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप

धनबाद (बरोरा): बाघमारा अंचल के सिंदवारटांड (हीरक रोड) स्थित दरिदा मौजा में चहारदीवारी को लेकर चल रहा विवाद अब गरमाता जा रहा है। स्थानीय रैयतों ने एक प्रेस वार्ता आयोजित कर जिले से बाहर के एक जनप्रतिनिधि पर मामले को अनावश्यक रूप से उलझाने और राजनीति करने का गंभीर आरोप लगाया है।
​सोमवार को चहारदीवारी के भीतर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुराइडीह, दरिदा, पोचरी और सिंदवारटांड के आदिवासी व गैर-आदिवासी ग्रामीणों ने अपनी चुप्पी तोड़ी और विवाद के पीछे की सच्चाई सामने रखी।
​"जनहित के लिए दान की गई है जमीन"
​ग्रामीणों ने अपने पूर्वजों की जमीन के कागजात दिखाते हुए स्पष्ट किया कि जिस भूमि को लेकर विवाद पैदा किया जा रहा है, वह असल में 'बाबा तिलका मांझी सेवा स्मारक समिति, दरिदा' को समर्पित है।
​दान का उद्देश्य: रैयतों ने बताया कि उन्होंने समाज के उत्थान के लिए स्वेच्छा से यह जमीन समिति को दान दी है।
​भविष्य की योजनाएं: इस विवादित बताई जा रही जमीन पर विद्यालय, अस्पताल, वृद्धाश्रम और मंदिर निर्माण की योजना है। समिति का लक्ष्य है कि यहाँ गरीब और आदिवासी बच्चों को मुफ्त और बेहतर शिक्षा मिल सके।
​बाहरी दखल और 'दलाली' का आरोप
​समिति के अध्यक्ष किशोर किस्कू और अन्य ग्रामीणों ने एक सुर में जिले के बाहर के एक जनप्रतिनिधि द्वारा अखबारों में दिए जा रहे बयानों का खंडन किया।
​भ्रामक प्रचार: ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ लोग जानबूझकर इस लोक-कल्याणकारी कार्य को विवादित बता रहे हैं ताकि जमीन पर कब्जा किया जा सके।
​साजिश का दावा: ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि कुछ दलाल साजिश के तहत इस जमीन को हड़पना चाहते हैं, जिसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा।
​मौके पर मौजूद ग्रामीण
​प्रेस वार्ता के दौरान सोनाराम मांझी, फुलो देवी, जयलाल मुर्मू, फागू मांझी, अर्जुन रवानी, पाचु राय, विनोद राय, लखी मांझी, पवन बासके, सुखलाल किसकू और शिवलाल हेंब्रम सहित दर्जनों स्थानीय लोग उपस्थित थे, जिन्होंने समिति के कार्यों का पुरजोर समर्थन किया।

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