देवघर बनेगा पर्यटन का बड़ा हब: नंदन पहाड़ पर ग्लास ब्रिज और त्रिकूट रोपवे फिर शुरू करने का प्रस्ताव; मेयर प्रतिनिधि ने उठाई आवाज़
देवघर: बाबा वैद्यनाथ की पावन नगरी देवघर को विश्वस्तरीय पर्यटन मानचित्र पर उभारने के लिए जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने कमर कस ली है। समाहरणालय सभागार में डीसी की अध्यक्षता में आयोजित 'जिला पर्यटन संवर्धन समिति' की बैठक में शहर के कायाकल्प को लेकर कई क्रांतिकारी प्रस्ताव रखे गए।
मेयर रवि कुमार राउत के प्रतिनिधि सचिन राउत ने बैठक में पुरजोर तरीके से देवघर की बुनियादी सुविधाओं और नए आकर्षणों को जोड़ने की वकालत की।
नंदन पहाड़ पर दिखेगा 'ग्लास ब्रिज' का रोमांच
बैठक में सबसे प्रमुख प्रस्ताव नंदन पहाड़ को लेकर रहा। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए यहाँ ग्लास ब्रिज (कांच का पुल) बनाने का सुझाव दिया गया है। अगर यह प्रस्ताव धरातल पर उतरता है, तो देवघर पूर्वी भारत के उन चुनिंदा शहरों में शामिल हो जाएगा जहाँ आधुनिक पर्यटन की ऐसी सुविधा उपलब्ध है।
त्रिकूट रोपवे: सुरक्षा के साथ दोबारा शुरू करने पर ज़ोर
हादसे के बाद से बंद पड़े त्रिकूट रोपवे को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। समिति ने मांग की है कि पूरी सुरक्षा जांच और पुख्ता आपातकालीन (Emergency) व्यवस्था के साथ इसे जल्द शुरू किया जाए, ताकि पर्यटकों का भरोसा लौटे और स्थानीय रोजगार को गति मिले।
पर्यटन विकास के लिए 5 मुख्य एजेंडे:
नौलखा मंदिर में पाबंदी हटे: मंदिर परिसर में फोटो खींचने पर लगी रोक हटाने और हाई मास्क लाइटें लगाकर परिसर को रोशन करने की मांग की गई।
तपोवन क्षेत्र का सौंदर्यीकरण: तपोवन में नशेडि़यों के जमावड़े को खत्म कर वहां फाउंटेन और पार्क विकसित करने का प्रस्ताव दिया गया ताकि परिवार वहां सुरक्षित घूम सकें।
पौराणिक स्थलों का उद्धार: हरलाजोरी और हरिआश्रम कुटिया को नए पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने पर सहमति जताई गई।
श्रद्धालुओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार: बाबा मंदिर में धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार की घटनाओं पर चिंता जताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की गई।
हाथी पहाड़ में वेडिंग जोन: वार्ड 28 के हाथी पहाड़ में वेडिंग जोन बनाने का प्रस्ताव है, जिससे सामूहिक आयोजनों के लिए बेहतर जगह मिलेगी।
स्टेडियम और तालाबों का भी होगा कायाकल्प
बैठक में केवल पहाड़ों और मंदिरों की ही नहीं, बल्कि शहर की अन्य संपत्तियों पर भी चर्चा हुई। केकेएन स्टेडियम की सुरक्षा के लिए वहां लोहे की कीलों के उपयोग पर प्रतिबंध और जल संचयन की व्यवस्था करने की बात कही गई। साथ ही, छत्तीसी तालाब के सौंदर्यीकरण का प्रस्ताव भी रखा गया।