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LPG के विकल्प के रूप में एथेनॉल पर विचार, सरकार ने शुरू किए शुरुआती प्रयोग

नई दिल्ली | 24 मार्च 2026-:देश में रसोई गैस की बढ़ती चुनौती के बीच केंद्र सरकार अब एलपीजी के विकल्प के तौर पर एथेनॉल के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाश रही है। केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण सचिव संजीव चोपड़ा ने बताया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण गैस सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ा है। इसी को देखते हुए वैकल्पिक ईंधन पर काम तेज किया गया है।

एथेनॉल चूल्हों पर शुरुआती परीक्षण

सरकार ने एथेनॉल से चलने वाले चूल्हों के शुरुआती मॉडल तैयार किए हैं। फिलहाल ये मॉडल परीक्षण के चरण में हैं और बड़े स्तर पर उपयोग से पहले उनकी सुरक्षा और उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए मजबूत सप्लाई और सुरक्षित उपयोग बेहद जरूरी होगा।

सप्लाई चेन मजबूत करने की योजना

एथेनॉल को घर-घर तक पहुंचाने के लिए सरकार सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने पर भी काम कर रही है। डिस्टिलरी स्तर पर प्रयोग की योजना बनाई जा रही है, ताकि वितरण प्रणाली को व्यवस्थित किया जा सके। फिलहाल यह परियोजना प्रारंभिक चरण में है और इसके विभिन्न पहलुओं का अध्ययन जारी है।

एथेनॉल प्रोग्राम को मिलेगा बढ़ावा

सरकार पहले से ही एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को बढ़ावा दे रही है और अब इसकी मांग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत ब्लेंडिंग प्रतिशत बढ़ाने, डीजल में एथेनॉल मिलाने और टेक्सटाइल वेस्ट जैसे नए स्रोतों के उपयोग पर भी विचार किया जा रहा है।

PDS चावल की गुणवत्ता में सुधार

इसके साथ ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में मिलने वाले चावल की गुणवत्ता सुधारने की पहल भी की जा रही है। पांच राज्यों में चल रहे पायलट प्रोजेक्ट में टूटे चावल की मात्रा 25% से घटाकर 10% कर दी गई है। अतिरिक्त टूटे चावल का उपयोग एथेनॉल उत्पादन में किया जा सकता है।

अभी शुरुआती चरण में योजना

सरकार की यह पूरी पहल अभी शुरुआती चरण में है और इसे लागू करने से पहले कई स्तरों पर परीक्षण और मंजूरी जरूरी होगी। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो भविष्य में एथेनॉल रसोई ईंधन के रूप में एक प्रभावी विकल्प बन सकता है, जिससे एलपीजी पर निर्भरता कम होने के साथ बायोफ्यूल सेक्टर को भी बढ़ावा मिलेगा।

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