*विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग में आकाशवाणी, दरभंगा द्वारा त्वरित भाषण प्रतियोगिता आयोजित*
*विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग में आकाशवाणी, दरभंगा द्वारा त्वरित भाषण प्रतियोगिता आयोजित*
*प्रतियोगिता में ज्योति कुमारी- प्रथम, दर्शन सुधाकर- द्वितीय, नेहा कुमारी-तृतीय तथा हितांशी कुमारी ने पाया चतुर्थ स्थान*
आकाशवाणी की 90 वीं वर्षगांठ के अवसर पर विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग में "आकाशवाणी @90 : त्वरित भाषण प्रतियोगिता" का आयोजन आकाशवाणी, दरभंगा के तत्वावधान में किया गया। इस प्रतियोगिता में हिन्दी के स्नातकोत्तर छात्र–छात्राओं तथा शोधार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
प्रतियोगिता का उद्घाटन करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो.उमेश कुमार ने कहा कि छात्र–छात्राओं और शोधार्थियों के लिए आकाशवाणी से जुड़ना सृजनात्मक कार्य है। इसके माध्यम से छात्र–छात्राओं में प्रतिभा का विकास होता है तथा नेतृत्व की क्षमता विकसित होती है।
कार्यक्रम के अतिथि विश्वविद्यालय संस्कृत विभाग के सह–प्राचार्य एवं एनएसएस पदाधिकारी डॉ. आर. एन. चौरसिया ने कहा कि छात्र–छात्राएं यदि पूरी लगन से मेहनत करें तो सफलता निश्चित रूप से मिलेगी। आकाशवाणी छात्रों को एक प्लेटफार्म प्रदान कर रहा है, जहां से वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए जीवन आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने छात्र–छात्राओं को अपने कई संस्मरण सुनाकर प्रेरित भी किया।
वहीं आकाशवाणी दरभंगा के कार्यक्रम प्रमुख असअद दाऊद ने कहा कि त्वरित भाषण प्रतियोगिता के विजेताओं को आकाशवाणी के कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर प्रदान किया जाएगा तथा यथोचित मानदेय देने की भी व्यवस्था रहती है।
आकाशवाणी, दरभंगा के कार्यक्रम अधिशासी बिनीत कुमार ठाकुर ने बताया कि हम देशभर में युवाओं के बीच आकाशवाणी @90 कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं। इसका उद्देश्य युवाओं को रेडियो के जरिए स्वस्थ एवं विश्वसनीय मनोरंजन से जोड़ना है। हमारे यहाँ युवाओं, स्त्रियों और जनपदीय–ग्रामीण संस्कृति पर केन्द्रित कई कार्यक्रम होते हैं, जिनमें युवा वाणी, नारी संसार, नमस्कार मिथिला तथा गाम-घर आदि प्रमुख हैं।
इस त्वरित भाषण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर शोधार्थी ज्योति कुमारी, द्वितीय स्थान पर शोधार्थी दर्शन सुधाकर, तृतीय स्थान पर स्नातकोत्तर छात्रा नेहा कुमारी एवं चौथे स्थान पर स्नातकोत्तर छात्रा हितांशी कुमारी रहीं।
कार्यक्रम में विभागीय प्राचार्य प्रो. विजय कुमार, सह–प्राचार्य डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद सुमन, सह–प्राचार्य डॉ.महेश प्रसाद सिन्हा, डॉ.मंजरी खरे एवं बड़ी संख्या में शोधार्थी एवं छात्र–छात्राएं उपस्थित थे।